चरखी दादरी। जिला स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए दादरी के लोहारू राेड स्थित जयहिंद अस्पताल को सील कर दिया। ये कार्रवाई अस्पताल प्रबंधन की अनियमितताओं पर संज्ञान लेकर की गई। वहीं, कार्रवाई के विरोध की आशंका के चलते ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। रात करीब साढ़े 10 बजे अस्पताल को सील किया गया। वहीं, इस मामले में कार्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन सीएमओ और डिप्टी सीएमओ को सस्पेंड किया गया है।
नाम न छापने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2015 व वर्ष 2020 में एक मरीज ने दो ऑपरेशन करवाए थे। वर्ष 2020 में मरीज ने जयहिंद अस्पताल में ऑपरेशन करवाया था। वर्ष 2022 में उसने दिल्ली के एम्स अस्पताल में जांच करवाई तो पेट में गॉज (पट्टी) होने की बात उसे पता चली। इसके बाद मरीज ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष इसकी शिकायत की। इस पर संज्ञान लेकर सीएम ने रोहतक पीजीआई के चिकित्सकों का बोर्ड बनाकर जांच करवाई।
बोर्ड ने तीन दिन पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें मरीज के दूसरे ऑपरेशन के दौरान जयहिंद अस्पताल के चिकित्सक की ओर से चूक होने का अंदेशा जाहिर किया गया। इतना ही नहीं आयुष्मान योजना में भी जयहिंद अस्पताल के फर्जीवाड़ा करने के तथ्य विभाग के सामने आए और इस आधार पर अस्पताल को आयुष्मान पैनल से हाल ही में बाहर किया गया है। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान हुई चूक को लेकर उक्त मरीज शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिला और उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को कार्रवाई का आदेश दिया।
महानिदेशक के आदेश पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने दो टीमें गठित कीं और शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे दोनों टीमों ने एकसाथ जयहिंद अस्पताल में छापा मारा। टीम की कार्रवाई रात करीब साढ़े 10 बजे तक चली और अस्पताल को टीम ने सील कर दिया। कार्रवाई करने पहुंची एक टीम की अगुवाई डॉ. गौरव भारद्वाज ने की और इसमें डॉ. अंकुर नागर, डॉ. नरेंद्र शामिल रहे। वहीं, दूसरी टीम की अगुवाई ड्रग्स कंट्रोलर तरुण मित्तल ने की और डॉ. राहुल इसमें शामिल रहे।
अस्पताल में भर्ती मिले 18 मरीज, एंबुलेंस के जरिये किया शिफ्ट
टीम जब जयहिंद अस्पताल पहुंची तो वहां 18 मरीज भर्ती मिले। इनमें से एक मरीज को उपचार के लिए रोहतक पीजीआई और दो को सिविल अस्पताल भेजा गया। 14 मरीजों की फाइल देखने के बाद उन्हें घर जाने की सलाह दी जबकि एक अन्य मरीज ने रोहतक पीजीआई जाने से इन्कार कर दिया।
पहले तीमारदार अड़े, फिर आईएमए पदाधिकारी भी पहुंचे मौके पर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जयहिंद अस्पताल को सील करने के लिए जब मरीजों को रेफर करने की बात कही तो उनके तीमारदारों ने विरोध शुरू कर दिया। वहीं, कुछ देर बाद आईएमए पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम से कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महानिदेशक की ओर से जारी पत्र उन्हें दिखा दिया।
160 कर्मचारियों में बनी रोजगार की चिंता
जयहिंद अस्पताल में तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि यहां 160 स्टाफ सदस्य कार्यरत हैं। वहीं, अस्पताल को सील करने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम के निर्देशों पर पुलिस कर्मचारियों ने सभी स्टाफ सदस्यों को बाहर निकाल दिया। वहीं, इसके बाद स्टाफ सदस्य रोजगार को लेकर बातचीत करते नजर आए।
अस्पताल को सील करने पहुंचे अधिकारियों ने बंद रखी जुबान
जिला स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार रात इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया, लेकिन बावजूद इसके अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। टीम में शामिल अधिकारियों ने मीडिया के समक्ष कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि लिंक ऑफिसर के तौर पर दादरी पहुंचे भिवानी सीएमओ रघुवीर शांडिल्य और दादरी के कार्यवाहक सीएमओ डॉ. राजविरेंद्र मलिक भी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।
तत्कालीन सीएमओ और डिप्टी सीएमओ को किया सस्पेंड
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच में स्थानीय अधिकारियों की ओर से भी लापरवाही बरती गई। इसके चलते तत्कालीन सीएमओ व डिप्टी सीएमओ पर भी गाज गिरी है। उन्हें सस्पेंड किया गया है। सूत्रों की मानें तो इस मामले की जांच में ढिलाई बरतने पर अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
अस्पताल संचालक कहीं बाहर गए हुए हैं। इस कार्रवाई को लेकर वो ही कुछ बता सकते हैं। अपना पक्ष रखते हुए आगे की कार्यवाही उन्हीं की ओर से की जाएगी।
-बलवंत यादव, जयहिंद अस्पताल संचालक के रिश्तेदार
इस कार्रवाई के लिए दो टीमाें का गठन किया गया। टीमों ने जांच की तो जयहिंद अस्पताल में कई अनियमितताएं पाई गईं और इसके चलते सील करने की कार्रवाई की गई। मुख्यालय के संज्ञान में ये मामला था।
-डॉ. गौरव भारद्वाज, डिप्टी सीएमओ