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Charkhi Dadri News: इकलौते बेटे को मुखाग्नि देने का साहस नहीं जुटा पाए प्रकाश, चचेरे भाई ने की अंतिम क्रिया

Sat, 31 May 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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झींझर गांव के श्मशान घाट में मुखाग्नि के समय रोते मृतक दीक्षित के पिता प्रकाश कुमार। 
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चरखी दादरी। झींझर निवासी पूर्व सैनिक प्रकाश फोगाट के इकलौते बेटे दीक्षित का शुक्रवार शाम पैतृक गांव के श्मशान घाट में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार किया गया। कलेजे के टुकड़े को चिता पर लेटा देखकर पिता प्रकाश कांप गया और चचेरे भाई राहुल ने चिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले शव घर पहुंचने पर दादी संतरा देवी फफक कर रो पड़ी।
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शुक्रवार सायं 4 बजे दीक्षित का शव कफन में लिपटा पैतृक गांव झींझर पहुंचा। ग्रामीण सुबह से ही गांव में शव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे जबकि महिलाएं भी दीक्षित के घर दादी संतरा देवी को संभालने पहुंचीं। दीक्षित का शव पहुंचा तो दादी संतरा देवी कफन में लिपटे पोते को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने कहा कि पहलै बुलाया तो आया कोणी, ईब आया है तो बोलता कोणी....।
करीब 30 मिनट तक दीक्षित का शव घर रहा और उस दौरान विभिन्न रस्में पूरी की गईं। इसके बाद दीक्षित का शव अंतिम संस्कार के लिए रामबाग ले जाया गया। यहां पर दीक्षित के पिता प्रकाश फोगाट लाडले को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हो गए और चिता से कुछ देर चले गए। इसके बाद चचेरे भाई राहुल ने मुखाग्नि दी और इसके बाद अंतिम संस्कार में शामिल लोग पिता प्रकाश व अन्य परिजनों को सांत्वना देते हुए रवाना हो गए।
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- जानिये...क्या है मामला
हिसार के सातरोड़ में झींझर निवासी पूर्व सैनिक प्रकाश फोगाट के इकलौते बेटे दीक्षित की वीरवार सुबह दो गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या को एक साल पहले बेंच पर बैठने को लेकर हुई कहासुनी के चलते पूर्व सहपाठी ने अंजाम दिया। उसने दादा की डोगा बंदूक से दीक्षित की हत्या की। वारदात में दम तोड़ने वाला दीक्षित और आरोपी दसवीं कक्षा के छात्र हैं। शुक्रवार दोपहर हिसार में दीक्षित का पोस्टमार्टम हुआ और उसके बाद शव शाम को पैतृक गांव झींझर पहुंचा।
- मुखाग्नि से ठीक पहले टूट गए प्रकाश, ग्रामीणों ने संभाला
श्मशान घाट में जब बात दीक्षित को मुखाग्नि देने की बात आई तो पिता प्रकाश से ग्रामीणों ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहा। लेकिन वो चिता से पीछे खिसक गए और मुखाग्नि देने से इंकार कर दिया। प्रकाश रोने लगे और इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें संभाला।
- बिलख उठी दादी संतरा, पोतों ने संभाला
पोते दीक्षित के अंतिम दर्शन करते वक्त दादी संतरा देवी भावुक हो गई। विलाप करते हुए वो दीक्षित के किस्से बताने लगीं। महिलाओं के सांत्वना देने के बाद भी उनके आंसू नहीं रुके और इसके बाद उनके पोते उन्हें वहां से दूसरे कमरे में ले गए।
- ग्रामीण बोले: इकलौता चिराग खोने से प्रकाश के परिवार पर टूट दुखों का पहाड़
दीक्षित हत्या प्रकरण की चर्चा झींझर गांव में वीरवार से ही है। हालांकि प्रकाश का गांव में आना-जाना कम ही था और 12 साल पहले वो बच्चों व पत्नी के साथ हिसार शिफ्ट हुए थे। ग्रामीण सूरज, दीपक, अंकित, राजेश, नरेंद्र और मनोज ने बताया कि इकलौता चिराग खोने से प्रकाश के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। घटना का पता लगने के बाद से गांव में गमगीन माहौल है।
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