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Charkhi Dadri News: पुलिस के पहरे में बांटी गई डीएपी खाद, 800 बैग में से 400 वितरित

Thu, 25 Sep 2025 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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पुरानी अनाज मंडी में डीएपी खाद लेने के लिए पहुंची महिलाओं को लाइन में लगाती महिला पुलिस कर्मचार
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संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। नगर स्थित पुरानी अनाज मंडी में बुधवार को डीएपी खाद पुलिस के पहरे में बांटी गई। जमींदारा सोसायटी कार्यालय में 800 बैग पहुंचे थे जो शाम तक बांट दिए गए। एक किसान को दो बैग डीएपी दिए गए।
खाद लेने के लिए महिला किसान भी धूप में लाइन में डटी रहीं। इस दौरान पुलिस की दो गाड़ियां मौके पर खड़ी रहीं। किसान सुबह सात बजे ही खाद वितरण केंद्र के बाहर लाइन में लगने शुरू हो गए थे। सुबह 10 बजे तक चार लाइनें बन गईं। महिलाओं की लाइन भी पुरुषों जितनी लंबी लग गई।
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सुबह नौ बजे खाद का वितरण शुरू कर दिया गया जो कि शाम को पांच बजे तक किया गया। एक किसान को दो बैग डीएपी दी गई। रबी सीजन में सरसों, जौ व गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी 14 हजार व यूरिया खाद की 30 हजार एमटी की जरूरत है। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है।
जिले में रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, गेहूं व मेथी आदि की फसलें उगाई जाती हैं। सरसों किसानों की पसंदीदा फसल है। यह नकदी फसल मानी जाती है। इसमें सिंचाई की कम जरूरत होती है। लागत खर्च भी कम आता है। सरसों का सरकारी रेट भी बढिय़ा है। इसी प्रकार, गेहूं की बिजाई कम क्षेत्र में होती है। सरसों की बिजाई हर साल करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है जबकि गेहूं का रकबा 40 हजार हेक्टेयर तक ही पहुंच पाता है। बिजाई के दौरान जरूरत पड़ती है डीएपी खाद की
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बिजाई के दौरान किसान डीएपी डालते हैं। इसी प्रकार यूरिया का छिड़काव पहली सिंचाई के बाद किया जाता है। आजकल डीएपी खाद का किसान ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने लगे हैं जबकि रासायनिक खाद फसलों के लिए हानिकारक माना जाता है। जैविक व गोबर की देसी खाद ज्यादा कारगर होती है इस खाद से जमीन की प्राकृतिक रूप से उर्वरा शक्ति बढ़ती है। पैदावार भी अच्छी मिल जाती है।
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