- गर्भपात होने वाले क्षेत्र में अधिकारियों की जवाबदेही तय
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। लिंगानुपात में सुधार करने और समाज में लड़का व लड़की में भेदभाव की मानसिकता को दूर करने के लिए सरकार के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग ने कारगर योजना बनाई है। योजनानुसार ‘सहेली द्वारा महिला को गर्भपात नहीं करवाने के लिए समझाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सहेली का नाम दिया है। गैरकानूनी ढंग से गर्भपात किए जाने वाले संबंधित क्षेत्र की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, सहेली व एएनएम, सीएचओ की जवाबदेही होगी।
उपायुक्त मुनीश शर्मा ने बताया कि लिंगानुपात में सुधार के लिए बनाई गई योजना के अनुसार एक या एक से अधिक लड़कियों वाले परिवार पर स्वास्थ्य और संबंधित विभागों की पैनी नजर रहेगी। इसके लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में पुलिस अधीक्षक, ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी शामिल हैं।
इस कमेटी की हर महीने में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें लिंगानुपात में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह सीएचसी से लिंगानुपात में सुधार के लिए किए गए प्रयास और बच्चों के जन्म के बारे में समीक्षा की जाएगी। इसमें यह भी देखा जाएगा कि उनके क्षेत्र में कितनी एमटीपी की बिक्री हुई हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में कुछ ही ऐसे वैध सेंटर हैं, जहां पर एमटीपी किट उपलब्ध होती है। इनके अलावा, यदि कहीं भी किसी मेडिकल स्टोर या अन्य किसी जगह पर एमटीपी किट मिलती है तो वह गैर कानूनी है। उन्होंने बताया कि लिंगानुपात में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार गर्भपात की सूचना देने वालों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से दस हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाएगा। यह लिंगानुपात में सुधार के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने बताया कि लिंगानुपात में सुधार के लिए लड़कों के मुकाबले कम लड़कियों वाले गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।