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चिकित्सक रहे हड़ताल पर, बिना उपचार सिविल अस्पताल से लौटे मरीज

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चिकित्सक कक्ष के बाहर बैठे मरीज। - फोटो : CharkhiDadri
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मुख्य दो मांगों को लेकर वीरवार को राजकीय स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सक हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों के ओपीडी न देखने से मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ी। हालांकि हड़ताल से इमरजेंसी सेवा प्रभावित नहीं हुई, लेकिन चिकित्सकों ने सामान्य ओपीडी अटेंड नहीं की। ओपीडी सेवाएं बंद रहने से दोपहर बाद सिविल अस्पताल में वीरानी छा गई। वीरवार को जिले के 12 चिकित्सक हड़ताल में शामिल हुए। वहीं, ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों ने रोष जाहिर किया और काफी देर इंतजार करने के बाद मजबूरी में घर लौट गए।
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चिकित्सकों के वीरवार को हड़ताल पर होने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई रहीं। सिविल अस्पताल में चिकित्सकों ने इमरजेंसी केस अटेंड किए। वहीं, डेंटल सर्जन ने नियमित दिनचर्या की तरह ही ओपीडी देखी। ओपीडी कक्ष में चिकित्सक न मिलने से मरीजों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। वहीं, अधिकारियों ने हड़ताल में शामिल चिकित्सकों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के पास भेज दी है। चिकित्सकों के हड़ताल पर होने के बावजूद ओपीडी काउंटर खुला रहा।
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की पहले से ही कमी बनी हुई है। वीरवार को यहां नियुक्त चिकित्सकों की हड़ताल ने मरीजों की परेशानियां और बढ़ा दी। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में करीब 38 चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से कुछ छुट्टी पर चल रहे हैं, जबकि वीरवार को 12 चिकित्सक हड़ताल में शामिल हुए। वहीं, सीएचसी व पीएचसी सहित सिविल अस्पताल में डेंटल सर्जनों ने अपनी सेवाएं सामान्य दिन की तरह ही जारी रखीं। दादरी सिविल अस्पताल के अधीन तीन सीएचसी (गोपी, बौंदकलां व झोझूकलां) और 14 पीएचसी हैं। इन सभी पर स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सकों की हड़ताल के चलते लड़खड़ाई नजर आईं। सिरदर्द से लेकर सीने के दर्द से पीड़ित मरीजों को इंतजार के बाद लौटना पड़ा।
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औसतन 450 है सिविल अस्पताल की रोजाना की ओपीडी
दादरी सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 450 से 500 के बीच रहती है। सूत्रों की मानें तो 20 से 30 मरीज दांतों से संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन तीन से चार केस सड़क हादसों से संबंधित आते हैं। करीब 80 फीसदी ओपीडी सामान्य बीमारियों से संबंधित होती हैं। वीरवार को सिविल अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह से ठप रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी परेशान रहे मरीज
सिविल अस्पताल के अलावा जिले में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चौदह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हालांकि इन सभी पर चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। जिन पीएचसी और सीएचसी में चिकित्सक तैनात हैं, वहां भी ओपीडी अटेंड नहीं की गई। इसके चलते ग्रामीणों को दिक्कतें झेलनी पड़ीं और उपचार के लिए कुछ ने तो निजी अस्पतालों का रुख कर लिया।
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ये हैं चिकित्सकों की मांगें
- स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को स्पेशल अलाउंस मिले।
- चार, नौ, तेरह व बीस साल में चार बार एसीपी मिले।
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