चरखी दादरी। मैं गांव भागवी स्थित पीपल वाला जोहड़ हूं। मुझे सरकार ने अमृत सरोवर योजना में शामिल कर रखा है लेकिन मेरी ठीक प्रकार से सफाई नहीं करने मेरा क्षेत्रफल कम हो गया है। गांव का दूषित एवं बारिश का पानी जोहड़ में जाता है। मैं सुंदरीकरण के इंतजार में हूं।
बता दें कि पीपल वाला जोहड़ की इस समय चहारदीवारी भी अधूरी है। पिछले दिनों विभाग की ओर से जोहड़ की सफाई भी करवाई गई थी। लेकिन वह भी ठीक प्रकार से नहीं होने की वजह से मेरा क्षेत्रफल घट गया। मुझे सरकार ने अमृत सरोवर योजना में शामिल किया हुआ है। इस समय जोहड़ पानी से पूर्ण रूप से भरा है। जोहड़ में बारिश एवं गांव का दूषित पानी भरा है। मेरा पानी दूषित होने की वजह से पशु भी पीने से कतराते हैं। मेरे चारों तरफ पीपल के ज्यादा मात्रा में पेड़ होने की वजह से मेरा नाम पीपलवाला जोहड़ पड़ा। मेरे चारों तरफ कुएं भी हैं वे भी अपना पुराना स्वरूप खो चुके हैं। इनका पानी भी पीने लायक नहीं रहा। पुराने जमाने में लोग इन कुओं से पानी पीते थे। कुओं का पानी शीतल एवं अमृत के समान होता था, अब इनका पानी भी बदल गया है।
ग्रामीण बोले : गांव आबाद होने की निशानी है ये जोहड़
विभाग की ओर से जोहड़ की सफाई करवाई गई है। इसे अमृत सरोवर योजना में शामिल किया गया है। सफाई करने के बाद मिट्टी पूरी तरह से बाहर नहीं निकाली गई। आधी मिट्टी जोहड़ में रह गई जिससे इसका क्षेत्रफल सिकुड़ गया है। विभाग को चाहिए कि जोहड़ का क्षेत्रफल कम न होने पाए। बारिश सीजन के बाद इसका सुंदरीकरण कर दिया जाए तो बेहतर रहेगा। जब से गांव बसा है तब से जोहड़ बरकरार है।
रमेश कुमार तक्षक, ग्रामीण
जोहड़ कई सालों पुराना है। जब से गांव का खेड़ा बसा है तब से जोहड़ अपनी पहचान समेटे हुए हैं। जोहड़ के सुंदरीकरण की जरूरत है। इसके सौंदर्य को बढ़ाने के लिए हरियाली को बढ़ावा देना भी जरूरी है। जोहड़ प्राकृतिक धरोहर है। जोहड़ में बारिश व गांव का दूषित भर जाता है। इस समय जोहड़ का पानी खराब हो चुका है।
-संजय कुमार, पूर्व सरपंच