चरखी दादरी। बारिश से प्रभावित खेतों में जलभराव होने की वजह से मौके पर पटवारियों के नहीं पहुंचने से आई बाधा के चलते अभी तक जिला में 20 हजार एकड़ रकबे का सत्यापन नहीं हो सका है। राजस्व विभाग की टीमें सत्यापन में जुटी हैं। राजस्व विभाग के अधिकारी अगले एक सप्ताह में सत्यापन कार्य पूरा करने का दावा कर रहे हैं। बारिश से प्रभावित क्षेत्र के तौर पर जिले के ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर 2 लाख 73 हजार एकड़ रकबा दर्ज है। पूरा रकबा सत्यापन होने के बाद डीसी की संस्तुति के बाद मुख्यालय भेजा जाएगा।
इस बार जिला के कई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इसके कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ। फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए हरियाणा सरकार ने गत सितंबर माह में क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला था। नुकसान का सत्यापन 23 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश थे। अब ज्यादा जलभराव वाले क्षेत्र में सत्यापन करने में बाधा आई है। पटवारी मौके पर खेत में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उपायुक्त के निर्देशों के अनुसार राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार सत्यापन कर रहे हैं। 20 हजार एकड़ भूमि की फसलों का सत्यापन बाकी है।
कृषि विभाग के अनुसार ये है नुकसान का आकलन
कषि विभाग के प्रारंभिक आकलन में जिला में बारिश से प्रभावित क्षेत्र 2 लाख 23 हजार एकड़ है। सर्वाधिक बाजरा की फसल में नुकसान हुआ है। बाजरा का कुल 151000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित है। 5300 एकड़ फसल ऐसी हैं जिसमें 76 से 100 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन है। 41500 एकड़ एरिया में 51 से 75 प्रतिशत के बीच नुकसान का आकलन है। इसी प्रकार 114200 एकड़ में 26 से 51 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। सरकार आमतौर पर 50 प्रतिशत या इससे अधिक नुकसान पर ही मुआवजा देती है।
तहसीलदार व एसडीएम भी करेंगे पोर्टल पर सत्यापन
पोर्टल पर पटवारी की ओर से सत्यापन के बाद कानूनगो, गिरदावर, तहसीलदार, एसडीएम व डीसी को सत्यापन करना है। उसके बाद डीसी के माध्यम से नुकसान की रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय भेजी जाएगी। पटवारियों ने पहले तो नुकसान की जमीन का रिकार्ड तैयार किया है अब इसका सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के काम में 52 पटवारियों की ड्यूटी लगा रखी है।
बाजरा को सर्वाधिक नुकसान
उधर, कृषि विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में 2 लाख 23 हजार एकड़ में खड़ी बाजरा, ग्वार, धान, कपास व अन्य फसलों में नुकसान का आकलन है। सर्वाधिक नुकसान बाजरा की फसल को हुआ है। फसल का नुकसान प्रभावित क्षेत्र 1.51 लाख एकड़ है। बारिश से बाजरा, धान व कपास में ज्यादा नुकसान हुआ है। यही फसल जिला के अधिकांश क्षेत्र में है। बारिश की वजह से बाजरा की फसल पीली होकर सूख गई थी।
बेमौसमी व अत्यधिक बरसात के कारण फसल खराब हो गई थी और अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है। मुआवजा न मिलने के कारण घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को जल्द से जल्द सत्यापन करवाकर मुआवजा वितरण करना चाहिए।
ब्रह्मपाल बाढड़ा, किसान।
सरकार फसल सत्यापन के काम में देरी न करें। सरकार को जल्द मुआवजा देना चाहिए। रबी की फसलों की बिजाई के लिए खाद व बीज पर किसान का काफी पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में किसान को जल्द मुआवजा मिलना चाहिए। सरकार ने दिवाली से पहले मुआवजा देने का झूठा आश्वासन दिया था। किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
हरपाल सिंह भांडवा, अध्यक्ष ,भारतीय किसान यूनियन
सरकार किसान की समस्याओं के प्रति लापरवाह बनी हुई है। पिछला व मौजूदा खरीफ सीजन की फसलों का मुआवजा जल्द देना चाहिए। किसान आज कर्ज के बोझ में दबा हुआ है। फसलों का सत्यापन कार्य समय पर पूरा होना चाहिए।
रणधीर सिंह कुंगड़, अध्यक्ष ,किसान सभा
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ज्यादा जलभराव होने से पटवारी खेतों में मौके पर नहीं पहुंच सके। इस वजह से काम में बाधा आई है। अब एक सप्ताह में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बाद में डीसी की संस्तुति से नुकसान का विवरण सरकार को भेजा जाएगा। सरकार के फैसले के अनुसार बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जायेगी। विभाग के पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सत्यापन के कार्य में किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं आनी चाहिए और खराब हुई फसल का एक- एक इंच जमीन का सत्यापन किया जाए।
राजकुमार भौरिया, जिला राजस्व अधिकारी