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- दादरी पटवारखाना का भवन वर्ष 1995 में हुआ था कंडम, उसके बाद से शहर में अलग-अलग जगहों पर बैठ रहे पटवारी- लोगों को अपने गांव व क्षेत्र का पटवारी ढूंढने में खपाना पड़ता है समय, काम करवाने से पहले झेलनी पड़ती है शारीरिक परेशानी
चरखी दादरी। दादरी शहर में 29 साल पहले बिछड़े पटवारी अब तक एक छत के नीचे नहीं आ पाए हैं। इसका कारण पटवारखाना भवन की कमी है। पुराना पटवारखाना वर्ष 1995 में कंडम घोषित हुआ था। उसके बाद से पटवारी शहर में अलग-अलग जगहों पर बैठ रहे हैं। शहर में आकर अपने गांव या क्षेत्र के पटवारी का तंग गलियों में कार्यालय ढूंढना ग्रामीणों के लिए आसान नहीं है।
बता दें कि हलके में पटवारियों के लिए कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। इसके चलते पटवारी शहर में अलग-अलग जगहों पर किराये के भवनों में कमरे लेकर बैठ रहे हैं। इसके चलते इनके पास कार्य करवाने के लिए आने वाले लोगों को कार्यालय ढूंढने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, मजबूरन पटवारियों को भी मकान मालिक के कहने पर अपनी जगह बार-बार बदलनी पड़ रही है। पटवारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों और हलके के लोगों ने पटवारखाना भवन निर्माण की मांग की है। ताकि, आमजन को परेशानियों से छुटकारा मिल सके।
दरअसल, 29 साल पहले तक हलके के पटवारी झज्जर घाटी स्थित पटवारखाना में एक छत के नीचे बैठते थे। वर्ष 1995 में आई बाढ़ के दौरान पटवारखाना भवन जर्जर हो गया। इसके बाद से सभी पटवारी अलग-अलग जगहों पर किराये के मकानों में अपना कार्यालय चलाकर लोगों की जमीन और अन्य कार्याें का निपटान कर रहे हैं। मौजूदा व्यवस्था से लोगों के अलावा पटवारी भी परेशान हैं। संवाद
- वर्ष 1983 में बनाया गया था पटवारखाना
वर्ष 1983 में भिवानी के तत्कालीन उपायुक्त धर्मवीर सिंह ने झज्जर घाटी क्षेत्र में हलके के लोगों के लिए पटवारखाना का शिलान्यास किया था। उस दौरान लगभग 200 वर्गगज जमीन पर पटवारखाना भवन बनाया गया था। फिलहाल, स्थानीय लोग इस जगह पर अपने पशु बांध रहे हैं।
-.शहर के किन अलग-अलग क्षेत्रों में बैठते हैं हलके के 40 पटवारी
दादरी के 40 पटवारी अलग-अलग जगह बैठते हैं। गांव बधवाना बालरोड, पालड़ी, जावा, बीजणा, घसोला, रावलधी, बलकरा, संतोकपुरा, गोठडा, दूधवा, नौसवा, दातौली के पटवार फिलहाल पुरानी एलआईसी वाली गली में बैठ रहे हैं। गांव चिड़िया, मंदोला, मंदोली, आदमपुर दाडी, छिल्लर, मकड़ाना, मकड़ानी, महराणा, पातुवास के पटवारी सरदार झाडू सिंह क समीप बैठते हैं। ढाणी फोगाट, बीड समसपुर व टिकान कलां के पटवारी हीरा चौक क्षेत्र में और मौड़ी, टिकान खुर्द, खेड़ी सनसनवाल, कपूरी के पटवारी घिकाड़ा रोड स्थित पुराना रोजगार में बैठते हैं। बिरही कलां, बिरही खुर्द, बरसाना, तिवाला, छपार, डूडीवाला किशनपुरा, नंदकरण, डोहकादीना, अटेलाकलां, अटेला खुर्द के पटवारी शिव मंदिर वाली गली में बैठकर लोगों का काम निपटा रहे हैं। इन्हें बार-बार कार्यालय भी बदलने पड़ते हैं।
कंडम भवन के गिरने से हो सकता है जान-माल का नुकसान
वार्ड पार्षद विनोद सिंहमार ने बताया कि भवन की हालत काफी जर्जर है। रिहायशी क्षेत्र होने के कारण यहां से लोगों का अवागमन बना रहता है। ऐसे में पुराना जर्जर भवन गिरने से कभी भी हादसा हो सकता है। पुराने भवन को गिराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र भी भेजा गया है, लेकिन, अब तक गिराया नहीं गया है।
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झज्जर घाटी स्थित पुराना जर्जर पटवारखाना का जर्जर भवन। संवाद
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पटवारखानाा पर लगा शिलान्यास पट। संवाद
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हीरा चौक स्थित पटवारी कार्यालय में कार्य करवाने आए लोग। संवाद