चरखी दादरी। जिले में पिछले कई दिनों से बारिश न होने और लगातार पश्चिमी हवाएं चलने से धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। मानसून में अच्छी बारिश की उम्मीद में जिन किसानों ने धान की रोपाई की थी उन्हें अब खेतों में नमी बनाए रखने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। बारिश का लंबा अंतराल होने से फसलों में सिंचाई की जरूरत है। धान की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल को नियमित रूप से पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में बारिश न होने से उन्हें ट्यूबवेल और अन्य सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। लगातार सिंचाई करने से डीजल, बिजली व मजदूरी से अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। किसानों के अनुसार, एक एकड़ धान की सिंचाई पर प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो उत्पादन लागत और अधिक बढ़ सकती है।
खेतों में कम हो रही नमी
इस बार किसानों ने मानसून समय पर सक्रिय होने की उम्मीद के साथ धान की रोपाई की थी। जुलाई माह की शुरुआत में बारिश होने पर धान की रोपाई कर दी गई। अब मौसम शुष्क हो जाने और मानसून पर विराम लगने से खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल में लगातार पानी की उपलब्धता जरूरी होती है। लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और भविष्य में पैदावार पर भी असर पड़ सकता है।
अन्य फसलों पर भी असर
केवल धान ही नहीं बल्कि बाजरा, कपास, ग्वार व अन्य खरीफ फसलें भी इस समय सिंचाई मांग कर रही हैं। लगातार चल रही गर्म और शुष्क हवाओं से खेतों की नमी तेजी से सूख रही है। जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई संसाधन नहीं हैं वे सबसे अधिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होती है वहां सिंचाई करना और भी कठिन हो गया है।
आवश्यकता अनुसार करें सिंचाई
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आवश्यकता के अनुरूप सिंचाई करें। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए अनावश्यक पानी की बर्बादी से बचें। मौसम विभाग की सलाह का पालन करें। किसानों को उम्मीद है कि मानसून जल्द दोबारा सक्रिय होगा और अच्छी बारिश होने से धान सहित सभी खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी। यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो सिंचाई पर बढ़ रहे अतिरिक्त खर्च से राहत मिलने के साथ-साथ फसलों की बढ़वार भी सामान्य हो सकेगी।
वर्सन:
किसान जरूरत के अनुसार धान की सिंचाई करें। इस समय सभी प्रकार की फसलों के लिए बारिश की जरूरत है। किसान धान की खेती से परहेज करें। धान की जगह तिलहन व दलहन की खेती करें इससे मोटा मुनाफा सकते हैं।- कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग