ओवरलोड वाहनों से वसूली मामले में गिरफ्तार तत्कालीन डीसी अजय तोमर के पीए सुरेश कुमार ने न्यायिक हिरासत में जाने से पहले वसूली की रकम डीसी तक पहुंचाने की बात कबूली है। रोहतक कोर्ट में पेश चार्जशीट में पीए सुरेश कुमार ने माना है कि डीसी तक पैकेट पहुंचाने के उसे हर माह आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान से 15 हजार रुपये मिलते थे। वहीं, आरटीए सहायक सचिव ने भी डीसी, एडीसी और डीसी के पीए को वसूली की रकम का हिस्सा देने की बात मानी है।
चार्जशीट के अनुसार, पीए सुरेश कुमार ने बताया कि डीसी अजय सिंह तोमर मार्च 2018 से पहले चरखी दादरी के एडीसी थे। उनके पास आरटीए का चार्ज भी था। इसके बाद उन्हें पदोन्नति देकर डीसी चरखी दादरी बना दिया गया। सुरेश ने बताया कि डीसी अजय तोमर की आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान से पहले से जान-पहचान थी। अजय तोमर ने ही उसे अपने कार्यालय में बुलाकर मनीष मदान के बारे में बताया था। सुरेश ने बताया कि डीसी ने मनीष से एक पैकेट लेकर उन तक पहुंचाने की बात कही थी। इसके बाद उसने मनीष से पैकेट लेकर कैंप कार्यालय में पहुंचाना शुरू कर दिया। सुरेश ने खुलासा किया कि आरटीए सहायक सचिव मनीष इस काम के बदले उसे 15 हजार रुपये प्रतिमाह देता था। मनीष मदान से उसकी ज्यादातर फोन पर बातचीत होती थी।
चार्जशीट में तत्कालीन आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान ने भी कबूल किया है कि वह वसूल की गई रकम का हिस्सा डीसी अजय तोमर, उनकी पत्नी एवं तत्कालीन चरखी दादरी एडीसी कम आरटीए संगीता तेतरवाल को देता था। एक-दो बार उसने डीसी के पीए सुरेश को भी पैकेट दिया था। वहीं, आरटीए विभाग के क्लर्क अमित ने भी तत्कालीन डीसी और एडीसी को मंथली पहुंचाने की बात मानी है।
गिरफ्तारी से एक दिन पहले भी पैकेट पहुंचाने का किया था प्रयास
चार्जशीट के अनुसार, सुरेश कुमार ने कबूल किया है कि 17 मई को भी मनीष मदान का उसके पास फोन आया था। मदान ने कहा था कि डीसी साहब का पैकेट तैयार है। सुरेश ने बताया कि उस समय वह बाहर था और इसके चलते पैकेट बाद में लेने की बात कही। अगले दिन उसे पता चला कि मनीष सहित एक कर्मचारी और दो दलालों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार होने से एक दिन पहले भी मनीष ने डीसी को देने के लिए पैकेट तैयार कर रखा था।
19 हजार ही हुए सुरेश से बरामद
तत्कालीन डीसी के पीए सुरेश कुमार को एसआईटी ने झज्जर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने चार मोबाइल और 19 हजार रुपये बरामद किए थे। सुरेश ने बताया कि उसे हर माह 15 हजार रुपये मिलते थे। उसके पास जो रुपये आए थे उनमें से कुछ से उसने बच्चों की फीस भरने के अलावा घर में खर्च कर दिए। एसआईटी ने 19 हजार रुपये उसके मकान की एक अलमारी से बरामद किए थे।
अप्रैल माह में अपने हिस्से के दस लाख मदान ने कर दिए थे खर्च
चार्जशीट में मनीष मदान ने बताया कि अप्रैल माह में वसूली की रकम में से उसके हिस्से दस लाख रुपये आए थे। ये रुपये उसने खर्च कर दिए। मनीष की निशानदेही पर पुलिस ने 42 लाख दस हजार रुपये बरामद किए थे। ये रुपये पॉलिथीन में डालकर अलमारी में रखे थे। मनीष ने बताया कि वसूली की रकम को प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों में बांटा जाता था। इसके बाद बाकी रकम डीसी-एडीसी तक पहुंचाई जाती थी।