चरखी दादरी। शहर निवासी छह महिलाओं ने ऋण लेकर अपने हुनर को पंख लगाए और स्वरोजगार से घर की आर्थिक दशा को सुधार दिया। आज समूह की सभी महिलाएं खुशी-खुशी अपना व्यवसाय और हंसी व शांति से घर चला रही हैं। छह साल से मिट्टी के बर्तन बनाकर महिलाएं अपने हुनर से जिंदगी की गाड़ी दौड़ा रही हैं।
खास बात ये है कि इन महिलाओं के स्वरोजगार शुरू करने के बाद परिवार की आर्थिक हालत भी बेहतर हुई है। शहर निवासी महिला कमला देवी, मोनिका देवी, कृष्णा देवी, लक्ष्मी देवी, ममता देवी और अनीता देवी ने वर्ष 2017 में शहर के झज्जर घाटी क्षेत्र में प्रजापति महिला स्वयं सहायता समूह शुरू किया था। उनके एक परिचित व्यक्ति ने उन्हें समूह लोन लेकर अपना लघु उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद कमला ने अपने आसपास की पांच महिलाओं को भी इसकी जानकारी दी और वे भी इससे जुड़ गईं।
इन सभी ने शुरुआत में साठ हजार का ऋण लिया। इससे उन्होंने मिट्टी व अन्य सामान खरीदा और अपना छोटा सा कार्य शुरू किया। बाद में जब उन्होंने ये कर्ज चुकाया तो उन्हें दो लाख का ऋण और मिल गया। इससे उनका मुनाफा भी बढ़ा। सारा कर्ज चुकाने के बाद तीसरी बार उन्होंने पांच लाख का लोन लिया। अब एक साल के अंदर वे इसे भी चुका देंगी। इन महिलाओं ने बताया कि उन्होंने समूह ऋण लेकर सभी ने सदुपयोग किया और किसी ने मिट्टी के बर्तन बनाने शुरू किए तो किसी ने किराना की दुकान कर ली।
पति और परिजनों की परेशानी देख काम करने की ठानी
दरअसल, पहले ये सभी 6 महिलाएं घरेलू काम तक सीमित थी। इन्होंने आर्थिक मंदी से पति और अन्य परिजनों को परेशान होते देखा तो खुद भी काम करने की ठानी। स्वयं सहायता समूह ऋण योजना की जानकारी मिलने के बाद इनका मनोबल और बढ़ गया। जबसे इन महिलाओं ने स्वरोजगार शुरू किया है, उनके घर की स्थिति में सुधार आया है। उनका कहना है कि महिलाओं को भी गृह उद्योग शुरू करके घर की आमदनी बढ़ाकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। इससे महिलाओं का आत्मसम्मान बढ़ेगा और एक व्यक्ति पर घर का कार्यभार नहीं रहेगा।
पात्र महिलाएं बोलीं- खुद बनीं आत्मनिर्भर, परिवार की सुधरी दशा
पति के बीमार होने के बाद मैंने ये समूह बनाया और काम शुरू किया। अब पति को गुजरे हुए चार वर्ष हो गए और ये काम ही मेरा सहारा है। इसी से ही घर चलता है। दो साल से मिट्टी का काम मंदा होने के कारण मैंने चूड़ियों की रेहड़ी लगाई हुई है। इससे घर खर्च निकल जाता है।
कमला देवी, समूह प्रधान
- ऋण लेने के बाद मेरे घर की दशा संवर गई है। पहले पति अकेला मजदूरी करके जैसे-तैसे घर चलाता था। लेकिन पिछले छह साल से मेरा गृह उद्योग उनके लिए काफी सहारा बना है। अब हमें किसी के सामने पैसों के लिए हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
अनीता देवी, समूह खजांची
इस स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने ऋण का सदुपयोग करते हुए अपने रोजगार शुरू किए। कोई मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचती है तो कोई दुकान चलाती है। ऋण की नियमित किस्तें भरने से इन महिलाओं को फायदा हुआ। - विनय जोशी, एसएमआईडी, एनयूएलएम शाखा