संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। भारतीय संस्कृति की पुरानी पहचान रही है कि बुजुर्गों ने हमेशा आने वाली पीढ़ी को सत्य के मार्ग पर चलने की राह दिखाई है। वर्तमान में जिस प्रकार इंसान धन व वैभव के पीछे भाग रहा है, उसके चलते संतान में नैतिक मूल्यों व संस्कृति, विरासत की सीख देना भूल गया है। महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर आयोजित जिलास्तरीय यज्ञ यात्रा में स्वामी सच्चिदानंद ने ये बातें कहीं।
यज्ञ यात्रा के तीसरे दिन शांति निकेतन स्कूल परिसर में छात्रों को हमेशा बुजुर्गों का आदर करने व अच्छे लोगों का संग करने का संकल्प कराया गया। शुक्रवार को यात्रा झिंझर गांव से शुरू होकर समसपुर, दादरी शहर, ढाणी फोगाट, महराणा, भागवी होते हुए पातुवास गांव पहुंची। झिंझर की दादूराम कुटिया में ग्रामीणों ने सत्संग सुना। भजनोपदेशक जयपाल आर्य, सत्यपाल व महंत हरिदास ने प्रेरणादायक भजन सुनाए।
इस अवसर पर स्वामी सच्चिदानंद ने ग्रामीणों से कहा कि असली संपत्ति को पहचानो। असली संपत्ति उनकी संतान है। बच्चों को संस्कारवान, चरित्रवान और नशे से बचाने का प्रयास करना चाहिए। यज्ञ यात्रा में आचार्य प्रवीण योगी, रामकुमार आर्य, सत्यवान आर्य जेवली, जगबीर आर्य, वेदप्रकाश आर्य, दीपांशु, यश, अनुराग, मोहित, अरविंद का सहयोग रहा।