कई बुजुर्गाें ने कंपकंपाती अंगुली से दबाया ईवीएम का बटन
कुछ अपनों का सहारा लेकर पहुंचे मतदान केंद्र पर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बुजुर्ग मतदाता उम्र की बाधा को लांघकर शनिवार को मतदान करने बूथों पर पहुंचे। इनमें से कई ऐसे रहे जिनकी उम्र 85 और 100 वर्ष से अधिक रही। पात्र होने के बावजूद उन्होंने घर से वोट डालने के लिए आवेदन नहीं किया और पूरे जज्बे के साथ मतदान करने बूथों पर पहुंचे। इन बुजुर्गाें ने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर युवाओं के लिए नजीर पेश की।
बातचीत में बुजुर्ग मतदाताओं ने कहा कि वह हर चुनाव में देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हैं। इस बार भी सिलसिला जारी रहने की खुशी है। पैदल चलने में असमर्थ होने के बावजूद कई बुजुर्ग अपने परिजनों का सहारा लेकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे और मतदान कक्ष में जाकर कंपकंपाती अंगुली से ईवीएम का बटन दबाया।
कोई 60 साल से तो कोई 67 साल से डाल रहा वोट
मेरी उम्र 84 साल है। मैं हर चुनाव में करता हूं। वोट डालने के लिए हर साल बूथ पर जाता हूं। चाहे कोई भी चुनाव हो मैं कभी मतदान में पीछे नहीं रहता। अब भी मैंने सोच-समझकर मतदान किया है और मेरे परिजन भी वोट डालकर गए हैं। - ओमप्रकाश, मिसरी।
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वोट डालने के बाद मैं बहुत खुश हूं। फिलहाल मैं 92 साल की हो चुकी हूं। वर्ष 1967 से लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभा रही हूं। वोट डालने पर खुशी तो बहुत होती है, लेकिन शब्दों में बता नहीं सकती। आज ऐसे उम्मीदवार को चयन किया जो अपने क्षेत्र का अच्छा विकास करेगा। - संतरा देवी, मिसरी।
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चुनाव में मतदान करने का मेरा उद्देश्य एक अच्छा उम्मीदवार चयन करना रहा है। मैं यहां अपनी बहू और बेटे साथ आई हूं और तीनों ने मतदान किया है। आज सरकार बनाने के लिए मैंने अपना योगदान दिया है। उम्मीद है कि इस बार भी एक अच्छी सरकार बनेगी। - मान कौर, सांवड़।
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आज मैं अपने बेटे के साथ मतदान करने आया हूं। मेरी उम्र 76 साल हो चुकी है और फिलहाल ज्यादा दूरी तक चलने-फिरने में असमर्थ हूं। लकड़ी और बेटे के सहारे चलकर मतदान बूथ पर पहुंचा और मतदान कर एक जनहितैषी उम्मीदवार चुना। - ईश्वर सिंह, झोझूकलां।
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हर चुनाव में वोट देते-देते बूढ़ी हो गई हूं। मेरी उम्र 81 साल है। मैं हमेशा बूथ पर जाकर अपना वोट डालती हूं। मैंने घर से कभी वोट नहीं डाला है और न ही कभी वोट डालने से दूरी बनाई है। आज भी स्वस्थ हूं और आसपास की महिलाओं को भी अपने साथ वोट डालने के लिए लेकर गई थी। - लक्ष्मी देवी, मिर्च।
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वोट डालना मेरे लिए कभी कष्टदायी नहीं रहा है। मैं 1952 से वोट डालकर अपना फर्ज निभा रही हूं। मुझे अपने वोट की कीमत पता है और सभी चुनावों में अपने मत का सफल प्रयोग करती हूं। इस बार भी मैंने हार नहीं मानी, अपने उम्र के 100 पड़ाव में भी वोट डाला है। - जीवनी देवी, रुदड़ोल।
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मैं हमेशा मतदान में हिस्सा लेती आई हूं और इस बार भी मतदान किया है। फिलहाल मेरी उम्र 104 साल हो चुकी है। इस उम्र में भी मुझे मतदान का चाव है और यह मेरा अधिकार भी है। मतदान करने के बाद मैं खुद को देशभक्त सैनिक के समान समझ रही हूं। मैं आजीवन मतदान करूंगी। - सुरसती देवी, रुदड़ोल।
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