चरखी दादरी। छोटे बच्चों और परिवारों की महिलाओं को स्वस्थ रखने में घर की पोषण वाटिका काफी कारगर साबित हो सकती है। दादरी के 62 आंगनबाड़ी केंद्रों में इस समय पोषण वाटिकाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जिनकी सब्जियां खाकर बच्चों की सेहत में सुधार आ रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी गीता सहारण ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि किचन गार्डन या पोषण वाटिका घर में बनाना पौष्टिक आहार ग्रहण करने की दिशा में एक अच्छी पहल है। इसीलिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने आंगनबाड़ी केंद्रों की खाली पड़ी भूमि में छोटी-छोटी क्यारियां बनाकर उनमें हरी सब्जियां लगानी शुरू कर दी हैं, जिससे कि अन्य महिलाओं को भी इसकी प्रेरणा मिल सके। इन पोषण वाटिकाओं में घीया, तोरी, पालक, हरा धनिया, मेथी, टमाटर, भिंडी, कद्दू, बैंगन, अनार, अमरूद व पपीता आदि लगाए गए हैं। इन फलों और सब्जियों में किसी प्रकार के रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता। ये घर-आंगन में लगी सब्जियां सेहत के लिए लाभकारी होती हैं। यही कारण है कि दादरी जिला में पहले अति कुपोषित बच्चों की संख्या 84 थी, जो कि अब घटकर सात रह गई है।
उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान इन वाटिकाओं में गिलोय, तुलसी, बथुआ, नागरमोथा आदि के भी पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं। ये वाटिका गर्भवती महिलाओं और बच्चों को साल भर ताजी सब्जियां दे सकती हैं। जिले के गांव चरखी, बलाली, नीमली, सांवड़, सौंफ, शहर के वार्ड 17 आदि में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बेहतरीन बागवानी की हुई है। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को मुरमुरे, दूध, बिस्कुट के अलावा ये सब्जियां भी बनाकर खिलाई जाती हैं।