चरखी दादरी। दादरी को उपमंडल से जिला मुख्यालय बने साढ़े पांच साल हो चुके हैं, लेकिन इसके अनुसार शहर में मूलभूत सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। इससे पहले दादरी को नगर पालिका से नगर परिषद का दर्जा मिला था और इसके साथ ही जनसंख्या और वार्डों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। जनसंख्या के अनुसार सुविधाएं न बढ़ने का खामियाजा अब तक लोग भुगत रहे हैं। वहीं, पुराने पार्षदों की मानें तो पहले शहर में चुंगी कर से विकास कार्य करवाए जाते थे, लेकिन अब लोगों से विभिन्न मदों में वसूले गए कर से शहरी विकास करवाया जाता है।
1987 और 1995 में पार्षद रह चुके शहर के प्रबुद्ध लोगों की मानें तो सन 1966 में शहर में सर्वे करवाकर हाउस टैक्स का निर्धारण किया गया था। सन 1987 से पहले करीब 25 साल तक नगरपालिका के चुनाव नहीं हुए थे। उस समय नगरपालिका के पास चुंगी कर से ही मुख्य आमदनी होती थी। शहर के चारों ओर चुंगी नाके होते थे। शहर के मेन रास्ते कच्चे ही होते थे। किला मैदान से रेस्ट हाउस तक रोड़ियों की कच्ची सड़क होती थी। शहर के चार द्वार थे। सन 2000 के बाद शहर की तस्वीर बदलनी शुरू हुई।
चरखी दादरी नगर पालिका में सन 1987 में जब चुनाव हुए, उस समय 15 पार्षद थे। हाउस टैक्स लगाने के लिए 1966 में सर्वे करवाई गई थी, जिसके आधार पर प्रति मकान टैक्स का निर्धारण किया गया था। बाद में हाउस टैक्स वसूला जाने लगा। उस समय सेल्स टैक्स विभाग भी कर लेता था। सन 1991 में नगर पालिका में पार्षदों की संख्या बढ़ाकर 17 करने की मांग उठाई गई। बाद में यह संख्या बढ़ाकर 17 और फिर 19 की गई। गत योजना में शहर में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 21 की गई थी और अब अगली योजना में वार्ड संख्या में विस्तार होगा। ऐसे में पिछले करीब 40 सालों में शहर की आबादी 25 हजार से बढ़कर 80 हजार से पार पहुंच गई है, लेकिन उस मुताबिक सेवाओं का दायरा नहीं बढ़ा।
- इंप्रूवेमेंट ट्रस्ट ने दुकानें बनवाकर तैयार करवाई मार्केट
नगर पालिका के बजाय इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने शहर में नया व पुराना बस स्टैंड पर दुकानें बनवाई थी। इस तरह इन क्षेत्रों में मार्केट का निर्माण हुआ। बाद में नक्शा पास करने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। नगर पालिका का तकरीबन रिकार्ड उर्दू भाषा में होता था। शहर में 1954-55 में बिजली सुविधा भी शुरू हो गई थी।
- सफाई कर्मचारी सिर पर उठाते थे कचरा, अब 35 से अधिक वाहन
पुराने पार्षदों के अनुसार पहले शहर से सफाई कर्मचारी सिर पर कूड़ा उठाते थे। सफाई का काम महिलाएं भी करती थीं। सफाई पर उस समय विशेष ध्यान होता था। आजकल घरों से कचरे का उठान होता है जबकि नगर परिषद के पास कचरा उठान के संसाधन भी आ गए।
- सीवर-पेयजल शहर की विकट समस्या
इस समय दादरी शहर की सबसे प्रमुख समस्या सीवर व पेयजल है। लगभग हर वार्ड के लोग इन समस्याओं का दंश झेल रहे हैं। दादरी शहर की आबादी के अनुसार पेयजल भंडारण क्षमता नहीं है जबकि शहर के ज्यादातर हिस्सों में सीवर लाइनें भी 35 से 40 वर्ष पुरानी हैं। ये लाइनें कंडम हो चुकी हैं और इसके चलते पानी की निकासी सुचारु रूप से नहीं हो पाती।
पूर्व पार्षद बोले : 2000 में शुरू हुआ था शहरी विकास
- सन 1987 में शहर के पार्षद रहे 81 वर्षीय प्रीतम जांगड़ा का कहना है कि सन 2000 के शहर में विकास होना शुरू हुआ है। उस समय वार्डों में सभी प्रकार की सुविधाएं नहीं होती थी। आजकल तो शहर में लोगों के घर से कचरे का उठान होता है।
- 1995 में पार्षद बने 83 वर्षीय गंगाराम बिरोहिया का कहना है कि चुंगी नाकों से ही नगरपालिका को आय होती थी। अब सरकार व जनता से भी आमदनी हो रही है। उस समय सुविधाएं नहीं थी जबकि आज शहर में बहुत बदलाव आया है।
-----
वर्जन::
शहर की सभी समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करवाया जाएगा। शहरी विकास पर हमारा विशेष फोकस रहेगा। जो भी शहर की समस्याएं हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से उठाकर समाधान करवाया जाएगा।
- बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद।