चरखी दादरी। शहर स्थित बलिदान खेल स्टेडियम में संचालित एथलीट अकादमी में आठ साल में खिलाड़ियों की संख्या में बीस फीसदी इजाफा हुआ है। कई खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाकर पदकों का शतक लगाया है।
कोच बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी तैनाती साल 2016 में इस खेल अकादमी में हुई थी। तब वहां केवल पांच खिलाड़ी खेलने आते थे। इसके बाद उन्होंने विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक कार्यक्रम आदि में खेलों का प्रचार किया। उन्हाेंने युवाओं और उनके अभिभावकों को खेलों के फायदे, कॅरिअर आदि की जानकारी दी।
उन्होंने लगातार चार साल तक जागरूकता मुहिम चलाकर युवाओं को खेल से जोड़ने का प्रयास किया। इस कारण युवाओं और अभिभावकों दोनों का खेलों के प्रति रुझान बढ़ा और वे खेलों में आगे आने लगे। अब इस अकादमी में रोजाना करीब 100 खिलाड़ी अभ्यास के लिए आते हैं। पिछले वर्षों में खिलाड़ियों ने मैदान में आकर अपनी प्रतिभा को निखारा है। वह 100 पदक जीत चुके हैं। अब वे राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
- 4 अंतरराष्ट्रीय और 15 राष्ट्रीय एथलीट हुए तैयार
कोच बिजेंद्र ने कहा कि अगर युवाओं में इसी तरह खेल में रुचि बनी रही तो आगामी समय में जिले का नाम खेलों के माध्यम से ही जाना जाएगा। अब नर्सरी में चार अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीयस्तर के 15 और राज्यस्तर के करीब 25 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। कोच का कहना है कि यहां आने वाले सभी खिलाड़ी मेहनती हैं और इसी के बलबूते वे आगे बढ़ रहे हैं। जिले के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कामयाबी दिलाना ही उनका लक्ष्य है।
- एथलीट नर्सरी के सात सुनहरे खिलाड़ी
कोच बिजेंद्र ने बताया कि अकादमी में कुल 12 महिला खिलाड़ी हैं। नर्सरी में सात सुनहरे खिलाड़ी हैं। इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर कई पदक जीतकर उनके प्रयास को सफल बनाया है। उन्होंने बताया कि दीपेंद्र डबास, ऋषभ साहू, अतुल साहू और संयम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। शॉटपुट में दीपेंद्र 30 पदक जीत चुके हैं। संयम ने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर पर 12 पदक जीते हैं। डिस्कस थ्रो में अतुल ने 10 पदक, निश्चय ने शॉटपुट में छह पदक, ऋषभ ने डिस्कस थ्रो में छह पदक और हर्ष जाखड़ ने आठ पदक जीते हैं। अंजलि ने दौड़ में 15 पदक जीते हैं।
ये है अकादमी में प्रवेश प्रक्रिया
कोच विजेंद्र सिंह ने बताया कि खेल नर्सरी में सरकार के नियमानुसार सभी खिलाड़ियों का ट्रायल लिया जाता है और उसी के आधार पर उनका चयन किया जाता है। अभी नर्सरी में 25 खिलाड़ी हैं और सभी को उम्र के हिसाब से सरकार की ओर से डाइट भत्ता दिया जाता है। नर्सरी से अधिक उम्र के खिलाड़ियों के चयन संबंधी कोई प्रक्रिया नहीं है। इसलिए हर युवा इसमें आकर खेल सकता है।
कोच ने बताया कि सभी खिलाड़ी सुबह और शाम आकर मैदान में अभ्यास करते हैं। यह युवा गर्मियों में सभी सुबह 5:30 बजे से आठ बजे तक और शाम चार से आठ बजे तक खेल अभ्यास करते हैं। सर्दियों में सुबह एक घंटा कम हो जाता है और शाम चार के बजाय तीन बजे खेलने आते हैं। बीच के समय में सभी अपने दैनिक कार्य करते हैं।
- खिलाड़ी बोले : सुविधा मिली तो प्रतिभा में आया निखार
हर युवा खिलाड़ी को अभ्यास के लिए एक अच्छा कोच और मैदान की जरूरत होती है। बलिदान स्टेडियम में दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं। कोच के सही मार्गदर्शन और मैदान में निरंतर खेल अभ्यास के कारण ही मैं राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकी हूं। - वंशिका कादयान, राष्ट्रीय खिलाड़ी।
खिलाड़ी के लिए कोच ही उसका सच्चा मार्गदर्शक होता है और उसी के अनुसार ही खिलाड़ी खेल में अपना प्रदर्शन करता है। कोच विजेंद्र सिंह ने उनको प्रशिक्षण देकर खेल प्रतिभा को निखारा है। पहले प्रदर्शन और प्रशिक्षण के लिए मंच के तौर पर खेल स्टेडियम मिला। -अंजलि कुमारी, राष्ट्रीय खिलाड़ी।
अभिभावक भी बच्चों के प्रदर्शन से खुश
जिले के खिलाड़ियों के लिए संचालित यह नर्सरी और अकादमी काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इसमें प्रशिक्षण लेकर युवा हर स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। - नफे सिंह साहू, अभिभावक
ऐसे खेल संस्थानों से युवाओं में आत्मनिर्भर बनने का जज्बा पैदा होता है और वे नौकरी की भीड़ की बजाय खेलों में कॅरिअर बनाकर अपना भविष्य उज्ज्वल कर सकते हैं। - सुरेंद्र सिंह, अभिभावक