जिला बन जाने और प्रतिवर्ष शहर का आवासीय एरिया बढ़ने पर अब कचरे के स्थायी प्रबंधन का संकट बढ़ गया है। शहर में प्रतिदिन उठान होने वाले कचरे का स्थायी तौर पर प्रबंधन नहीं होने से अब हालात खराब बनने लगे है। कचरे के रिसाइक्लिंग के लिए प्रोजेक्ट लगाए जाने की जरूरत है तब जाकर इसका स्थायी प्रबंधन संभव है। शहर में इस समय रानिया जोहड़ के समीप कचरा डाला जा रहा है।
शहर में ट्रैक्टरों, ऑटो टीपर और ई रिक्शा के जरिये प्रतिदिन कचरे का उठान किया जाता है। नगर परिषद ने इसके लिए डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा भी शुरू कर रखी है। प्रतिदिन शहर से करीब 20 टन कचरा निकलता है जिसे रानियां वाला जोहड़ डंपिंग प्वाइंट पर डाला जाता है। इससे आगे कचरे के निस्तारण का कोई प्रबंध नहीं है और इसके कारण अब रानियां वाला जोहड़ डंपिंग प्वाइंट पर भी जगह की कमी बनने लगी है।
जिला बन जाने के बाद सरकारी कार्यालयों से भी कचरा निकलता है। शहर में हर साल करीब 600 से ज्यादा नए मकान भी बन रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र का दायरा भी बढ़ रहा है। गोशाला व अन्य संस्थाओं से भी कचरा निकलता है। कचरे का नियमित उठान तो हो रहा है लेकिन इसका स्थायी तौर पर प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। शहर की आबादी भी लगातार बढ़ रही है। कचरे को जिस स्थान पर डाला जा रहा है वहां फिलहाल जगह तो है लेकिन आने वाले थोड़े ही समय में यह विकल्प भी खत्म हो जाएगा। इसके लिए अब कचरे का रिसाइक्लिंग करने का ही श्रेष्ठ विकल्प है। इस समय जिला में इस प्लांट की सख्त जरूरत बनी हुई है ताकि आने वाले समय में दिक्कत बढ़ने न पाए।
कचरा जलाने से प्रदूषित हो रही हवा
शहर की हवा भी खराब हो रही है। कचरे में कई बार आग आदि लगने पर और भी दिक्कत बन जाती है। कचरे से आसपास का एरिया भी प्रदूषित हो रहा है। पश्चिम दिशा में होने की वजह से शहर की आबोहवा भी प्रदूषित हो रही है। जिला में प्रदूषण का स्तर पर वैसे ही खराब बना रहता है।
ये निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाना है। पहले लोहारू में कचरा रिसाइक्लिंग यूनिट लगनी प्रस्तावित थी और दादरी का कचरा भी वहीं जाना था। जल्द ही हम शहर के लिए कोई प्रपोजल तैयार करेंगे।
संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद।