फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: दो माह बाद भी एमसीएच को बाल रोग विशेषज्ञ का इंतजार

Fri, 11 Apr 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो: 08
विज्ञापन

मातृ-शिशु अस्पताल में बनाई गई एसएनसीयू में रखीं मशीनें। संवाद
ग्राउंड रिपोर्ट


- शहर के सरदार झाडू सिंह चौक के समीप स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में बनी विशेषज्ञों की कमी नवजात शिशुओं पर पड़ रही भारी, हर माह 7 किए जा रहे रेफर
- जच्चा-बच्चा की तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे देने वाला प्रदेश का दूसरा सरकारी अस्पताल है दादरी एमसीएच, जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी एमसीएच यानी मातृ-शिशु अस्पताल प्रदेश का दूसरा ऐसा अस्पताल है, जहां जच्चा-बच्चा के लिए तमाम स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे हैं। यह दावा स्वास्थ्य विभाग का रहा है। दूसरी ओर, जमीनी हकीकत यह है कि इस अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं है। लाखों की मशीनें शोपीस बनी हैं।
दूसरी ओर विशेषज्ञ की कमी के चलते जन्मजात गंभीर बीमारियों से ग्रस्त शिशुओं को रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। प्रतिमाह ऐसे 7 केस रेफर किए जा रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ जैसी मूलभूत सुविधा भी सरकार दो माह बाद भी मुहैया नहीं करवा पाई है। स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. विरेंद्र यादव यहां जच्चा-बच्चा की तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे शुरू करने का दावा करके गए थे, लेकिन, अब तक यहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं भेजा गया है। मातृ-शिशु अस्पताल में उपचार करवाने आए मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती करवाने की मांग की है। ताकि, उपचार के अभाव में किसी बच्चे की मौत न हो।
विज्ञापन

दरअसल, सरदार झाडू सिंह चौक समीप स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में लगभग दो माह पहले ही नागरिक अस्पताल से लेबर रूम और एसएनसीयू यूनिट शिफ्ट की गई थी। वहां तैनात स्टाफ भी यहां लाया गया था। दूसरी ओर जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसके चलते बच्चों के उपचार के लिए अभिभावकों को दूसरे जिलों की खाक छाननी पड़ रही है।
- प्रतिमाह होती हैं 70 से अधिक डिलिवरी
मातृ-शिशु अस्पताल के लेबर रूम में प्रतिमाह 70 से अधिक डिलिवरी होती हैं। इनमें 7-8 बच्चों की प्री-मेच्योर डिलिवरी होती है। इसके चलते उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है। ठीक होने तक माता-पिता को वहीं रुकना पड़ता है, जो आसान नहीं है।
विज्ञापन

- इन मामलों में किए जाते हैं शिशु रेफर
स्वास्थ्य विभाग महिलाओं और बच्चों से जुड़ीं तमाम सेवाएं एक ही छत के नीचे देने के लिए डिलिवरी रूम और एसएनसीयू एमसीएच में लाया गया था। विशेषज्ञ की कमी के चलते नवजात शिशु रेफर करने का सिलसिला नही रुक रहा। समय से पूर्व जन्मे बच्चे, श्वसन तंत्र विकार, निम्म ब्लड शुगर, गंभीर संक्रमण, हृदय की कम धड़कन, मेटाबॉलिक विकार, कम वजन आदि जन्मजात दोष के मामलों में शिशुओं को रेफर किया जाता है।
वर्सन
बाल रोग विशेषज्ञ की मांग हमने मुख्यालय भेजी हुई है। जल्द ही जिले को विशेषज्ञ मिलने की उम्मीद है। उसके बाद समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
-डॉ. राजविंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें