लंबा समय बीतने के बाद भी सरकार ने दादरी में मनोरोग विशेषज्ञ की नहीं की तैनाती, मरीजों को रोहतक और गुरुग्राम के काटने पड़ रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की कमी खल रही है। लंबा समय बीतने के बाद भी सरकार मनोरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं कर पाई है। इसके चलते मरीज काउंसिलिंग के लिए रोहतक और गुरुग्राम जाने के लिए विवश हैं। पिछले दो साल में जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संदर्भ में निदेशालय को पांच बार मांग भेजी गई है। अब तक नतीजा सिफर है।
बता दें कि जिले की आबादी करीब साढ़े छह लाख है। शहर में सिविल अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 35 उप-स्वास्थ्य केंद्र हैं। दादरी के जिला बनने के साढ़े सात साल बाद सिविल अस्पताल में जिला स्तरीय उपचार मरीजों को नहीं मिल रहा है। मनोरोग विशेषज्ञ की कमी इसकी बानगी है।
दरअसल, मौजूदा समय में लोगों में भारी तनाव है। ऐसे में मनोरोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज यहां आने के बजाय सीधे रोहतक पीजीआई और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों का रुख करने के लिए मजबूर हैं। पीजीआई में मरीजों की भीड़ के चलते ज्यादातर मरीजों के तीमारदार निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें वहां पर महंगे उपचार के लिए जेबी ढीली करनी पड़ रही है।
- मेडिकल बोर्ड में भी विशेषज्ञ नहीं पूरे
मरीजों का मेडिकल बनाने के लिए सिविल अस्पताल में मेडिकल बोर्ड भी बैठता है। हालांकि, इसमें सभी विशेषज्ञ नहीं हैं। जिन विशेषज्ञों की कमी है, उनकी राय लेने के बाद मरीजों को दूसरे जिलों में भेजा जाता है। वहां जाकर उन्हें विशेषज्ञ की राय लेनी पड़ती है। इसके बाद मेडिकल प्रमाणपत्र बन पाता है।
- 1300 है सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 1300 रहती है। कुछ साल पहले की तुलना करें तो दैनिक ओपीडी करीब 50 फीसदी बढ़ी है। दूसरी ओर सरकार जिले को मेडिकल ऑफिसर देने में तो कामयाब रही है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी अब तक दूर नहीं हो पाई है।
- इन विशेषज्ञों के पद भी हैं खाली
दादरी सिविल अस्पताल की बात करें तो विशेषज्ञों के दस से अधिक पद खाली हैं। इनमें सामान्य सर्जन, बाल रोग विशेष और फिजिशियन अहम हैं। इसके चलते जिला स्तरीय कई सेवाएं प्रभावित हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्जन
मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए सरकार को मांग भेज चुके हैं। जिले में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती होते ही ओपीडी शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मरीजों को काउंसिलिंग के लिए दूसरे जिले के अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
- डॉ. नरेश, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी सिविल अस्पताल, जहां मनोरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। संवाद