बाढ़डा। मेहनत, अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास जब एक साथ कदम बढ़ाते हैं तो सफलता भी दोगुनी हो जाती है। बाढ़डा क्षेत्र के गांव बेरला की सगी बहनों सानिया और करीना श्योराण ने एक साथ नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। दोनों बहनों की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सानिया को 611 व करीना को 601 अंक मिले हैं।
दोनों बहनों ने अपनी स्कूली शिक्षा प्रज्ञा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भांडवा से पूरी की। विद्यालय में वे शुरू से ही मेधावी, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्राओं के रूप में पहचानी जाती थीं। उनके पिता संदीप श्योराण बाढ़डा रोजगार कार्यालय में कार्यरत हैं, जबकि माता अनीता कुमारी एक निजी विद्यालय में हिंदी अध्यापिका हैं।
माता-पिता ने बचपन से ही बेटियों को शिक्षा का महत्व समझाया और हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया। परिवार का कहना है कि दोनों बेटियां डॉक्टर बनने का सपना लेकर लगातार मेहनत करती रहीं और उसी का परिणाम आज सभी के सामने है।
ऑनलाइन व ऑफलाइन ली कोचिंग : नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए दोनों बहनों ने दो वर्षों तक लगातार तैयारी की। पहले वर्ष उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की, जबकि दूसरे वर्ष सीकर में रहकर विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन में कोचिंग ली। नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और अनुशासित दिनचर्या ने उनकी मेहनत को सफलता में बदल दिया।
डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना लक्ष्य : सानिया और करीना का कहना है कि उनकी मंजिल केवल डॉक्टर बनना नहीं है, बल्कि चिकित्सा सेवा के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद करना उनका सबसे बड़ा सपना है। उनका मानना है कि एक डॉक्टर का दायित्व केवल इलाज करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील रहना भी है।
सफलता की खबर मिलते ही गांव में उत्साह का माहौल बन गया। श्योराण खाप के प्रधान बिजेंद्र श्योराण, लिहाज सिंह श्योराण, सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह, धर्मपाल, हरिसिंह, रणबीर सिंह, राजू, पूर्व सरपंच जोगेंद्र सहित अनेक ग्रामीणों ने परिवार को बधाई दी।
प्रज्ञा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य वीरेंद्र साहू ने दोनों छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सानिया और करीना विद्यालय की अनुशासित और प्रतिभाशाली छात्राओं में शामिल रही हैं।
उनकी सफलता न केवल विद्यालय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। दोनों बहनों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि जब परिवार का विश्वास, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत साथ हो तो सफलता निश्चित होकर रहती है।