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Charkhi Dadri News: मेडिकल बोर्ड में नहीं सभी विशेषज्ञ, दूसरे जिलों में भेजे जा रहे दिव्यांग

Fri, 03 Feb 2023 09:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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वीरवार को सिविल अस्पताल में शारीरिक परीक्षण कराने पहुंचे दिव्यांग।
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चरखी दादरी। जिला में बनी विशेषज्ञों की कमी का खामियाजा सामान्य मरीजों के साथ दिव्यांगों को भी भुगतना पड़ रहा है। दिव्यांगता के मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए जांच करने वाले मेडिकल बोर्ड में सभी विशेषज्ञ न होने से मरीजों को दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। इसके चलते उन्हें शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ की कमी ज्यादा खल रही है।
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दरअसल, सिविल अस्पताल में हर वीरवार को दिव्यांगता की जांच करने के लिए मेडिकल बोर्ड बैठता है। इस बोर्ड में आर्थो और ईएनटी तो हैं, लेकिन फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। प्रत्येक वीरवार करीब 250 से 300 दिव्यांग सिविल अस्पताल पहुंचते हैं जिनमें से 50 से ज्यादा दिव्यांगों को भिवानी, रोहतक पीजीआई या अन्य जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ की राय के लिए भेजा जा जाता है। करीब दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पाई है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका सीधे तौर पर असर पड़ रहा है।
संवाददाता ने दिव्यांगों की जांच के लिए मुहैया कराई गई मेडिकल बोर्ड सुविधा की पड़ताल की। इस दौरान सामने आया कि सिविल अस्पताल में चार अप्रैल 2020 से यह सुविधा शुरू है। दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अब तक स्वास्थ्य विभाग के पास 3835 आवेदन आए हैं। इनमें से 1497 के दिव्यांगता कार्ड जेनरेट हो गए हैं जबकि 584 के रद्द हुए हैं। 217 आवेदक ऐसे हैं जो आवेदन के बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए मेडिकल बोर्ड के पास नहीं पहुंचे हैं। एक दिव्यांग अपना कार्ड सरेंडर कर चुका है। इसके अलावा 417 दिव्यांगों के मेडिकल परीक्षण के बाद केंद्रीय एजेंसी को बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
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- यूं रेफर किए 1069 दिव्यांग जिो में जो विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं, उनकी राय की जरूरत पड़ने पर दिव्यांगों को दादरी से भिवानी, रोहतक पीजीआई और बीपीएस खानपुर भेजा जाता है। अब तक 1069 दिव्यांग यहां से रेफर किए गए हैं। रेफर किए गए मरीजों के संवाददाता ने आंकड़े जुटाए तो सामने आया कि 597 दिव्यांग रोहतक पीजीआई, 316 बीपीएस खानपुर और 156 भिवानी भेजे गए हैं।
- आवेदन रद्द होने के ये रहे कारण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार दिव्यांगता के जो 584 आवेदन रद्द किए गए हैं, वो शर्तें पूरी नहीं कर पाए। उनमें 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता पाई गई और इसके चलते उनके सर्टिफिकेट नहीं बन सकते।
- दो साल में भेजी 20 डिमांड
विशेषज्ञों की कमी दूर कराने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग प्रयास तो कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही। संवाददाता की जांच में सामने आया कि पिछले दो सालों में फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए 20 डिमांड भेजी जा चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है।
जानिये... दिव्यांगों की जुबानी, रेफर की कहानी
- कानों से सुनने में मुझे दिक्कत है और दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवाने अस्पताल आया था। यहां से बीपीएस खानपुर रेफर किया गया। अब वहां जाना पड़ेगा।
साहिल, कमोद
- कान से सुन नहीं पाता हूं और दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मेडिकल परीक्षण कराने अस्पताल आया था। विशेषज्ञ की कमी से खानपुर रेफर किया गया।
वेदप्रकाश, बलकरा
जो विशेषज्ञ हमारे पास हैं वो मेडिकल बोर्ड में शामिल किए गए हैं। कुछ विशेषज्ञों की कमी है और इसे दूर कराने के लिए हम प्रयासरत हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दिव्यांगों को विशेषज्ञ की राय के लिए दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है।
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-डॉ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, चरखी दादरी
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