चरखी दादरी। आपूर्ति के दौरान घरों में पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग अब जिले के सभी 58 जलघर में बने टैंक की सफाई करवाएगा। यह कार्य मनरेगा के तहत शुरू करवा दिया गया है और जल्द इसे पूरा करने की योजना है। लंबे समय से जलघर में बने टैंक की सफाई नहीं हुई है और इसका सीधे तौर पर असर पानी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। विभाग की टैंकों को साफ कराने की योजना पर काम पूरा होने से जिले के करीब चार लाख से अधिक लोगों को फायदा पहुंचेगा।
घरों में शुद्ध एवं साफ पेयजल पहुंचाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग मनरेगा के तहत जलघरों की सफाई करवाएगा। इस योजना पर विभाग ने काम शुरू कर दिया है। जलघरों से अनावश्यक मिट्टी व गाद निकालने का काम मनरेगा के तहत होगा जबकि जलघर परिसर के बाकी हिस्से की सफाई विभाग के कर्मचारी करेंगे।
बता दें कि नहरी पानी से जलघरों के स्टोरेज टैंकों में पानी डाला जाता है। जलघरों की नियमित रूप से सफाई करने की जरूरत होती है ताकि पानी की गुणवत्ता में सुधार आए और लोगों के उपयोग के लिए शुद्ध पीने का पानी मिल सके। इस समय तकरीबन सभी जलघरों के टैंकों में मिट्टी, कचरा व गाद आदि का जमाव बना हुआ है। जिले में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने का प्रमुख कारण भी नियमित रूप से जलघरों की सफाई नहीं होना भी है। साल में कम से कम एक बार तो जलघरों की सफाई अवश्य होनी चाहिए। सफाई होने से वाटर टैंकों की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ेगी। वहीं, सीएमओ डॉ. कृष्ण कुमार का कहना है कि दूषित पेयजल का सेवन करना शरीर के लिए हानिकारक है। इससे पेट और त्वचा संबंधी बीमारियां होने का खतरा रहता है। अगर सप्लाई में दूषित पानी पहुंच रहा है तो उसे उबाल कर और ठंडा करके पीएं।
- बूस्टिंग स्टेशन और मुख्य जलघर के सैंपल आ चुके फेल
वर्ष 2021 में शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशन व मेन जलघरों के पेयजल के सैंपल लिए गए थे। शहर के सात बूस्टिंग में से पांच के सैंपल फेल पाए गए थे। इस पानी में क्लोरिन की मात्रा शून्य मिली थी। इसके अलावा टेस्ट रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी। उसके बाद विभाग हरकत में आया था और अब समय-समय पर पानी में क्लोरिन की मात्रा चेक करने का अधिकारी दावा कर रहे हैं।
- मानसून के बाद ज्यादा खराब बने हालात
मानसून सीजन में जलघरों का पानी ज्यादा खराब होता है। वाटर टैंकों की स्थिति और भी खराब हो जाती है। कई भागों में स्थित बूस्टिंग व पानी के टैंकों में समय-समय पर बारिश का पानी भी आ जाता है उसके साथ मिट्टी भी जमा हो जाती है। इससे पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। लंबे समय तक गाद व मिट्टी का जमाव होने की वजह से सप्लाई होने वाले पानी में क्लोरिन दवा का मिश्रण करने पर भी अजीब प्रकार की गंद आने लगती है ऐसे में यह पानी घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं हो पाता।
- चिड़िया और ढाणी फौगाट समेत पांच गांवों में पूरा हुआ काम
अब विभाग ने जलघरों की सफाई करवाने का काम शुरू कर दिया है। इसके तहत गांव चिड़िया व ढाणी फौगाट सहित 5 गांवों के जलघरों की सफाई करवाई जा चुकी है। जो वाटर टैंक खाली हो जाता है उसकी सफाई करवाई जा रही है ताकि उसमें साफ पानी डाला जा सके और पानी की गुणवत्ता में सुधार आ सके। विभाग आने वाले करीब 20 दिन में इस कार्य को पूरा करने की योजना में है।
सभी जलघरों के वाटर स्टोरेज टैंकों की सफाई करवाई जाएगी। इस प्लान पर काम शुरू कर दिया गया है। मनरेगा स्कीम के तहत सफाई का कार्य करवाया जाना है। विभाग कर्मचारी भी सफाई का काम करेंगे।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग