चरखी दादरी। जिले में इस वर्ष सरसों की बंपर पैदावार के बावजूद अनाज मंडियों में सरकारी बिक्री के प्रति किसानों का मोहभंग नजर आया। बाजार में सरसों की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक होने के कारण किसानों ने अपनी फसल को सरकारी केंद्रों पर बेचने के बजाय निजी आढ़तियों के पास बेचने में अधिक रुचि दिखाई है। इस वर्ष तय लक्ष्य से 10 लाख क्विंटल सरसों की आवक कम हुई है और खरीद केंद्रों पर महज 2.19 लाख क्विंटल पहुंची है।
वहीं पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो एमएसपी व बाजार भाव में खरीदी गई सरसों का अंतर साफ देखा जा सकता है। किसानों का कहना है कि वो अपनी फसल वहीं बेचेंगे जहां उनको अधिक दाम मिलेंगे। वहीं सरकार द्वारा इस सीजन के लिए तय किए गए लक्ष्य और मंडियों में हुई वास्तविक आवक के बीच का बड़ा अंतर कृषि विशेषज्ञों और बाजार जानकारों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
बता दें कि जिले में इस बार करीब एक लाख 60 हजार एकड़ भूमि पर सरसों की बिजाई की गई थी। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, प्रति एकड़ औसतन 8 क्विंटल पैदावार को देखते हुए इस साल कुल पैदावार 12 लाख 80 हजार क्विंटल होने की उम्मीद थी। इसी आधार पर सरकार ने जिले के लिए 12 लाख क्विंटल सरसों की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और ही स्थिति दिखा रहे हैं। अभी तक मंडियों में महज दो लाख 19 हजार 945 क्विंटल सरसों की कुल आवक हुई है जो कुल अनुमानित पैदावार से काफी कम है। संवाद
एमएसपी और बाजार भाव का असंतुलन
किसानों के इस रुख के पीछे का सबसे बड़ा कारण एमएसपी और बाजार भाव का असंतुलन है। सरकार ने इस बार सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था जबकि मंडियों में निजी आढ़ती किसानों को 6400 से 7000 रुपये तक के भाव दे रहे थे। ऐसे में किसानों ने अपनी मेहनत की उपज को वहीं बेचना उचित समझा जहां दाम बेहतर मिले। हालांकि, सरकारी खरीद शुरू होने के करीब 20 दिनों बाद जब बाजार भाव में हल्की गिरावट आई तब कुछ किसानों का रुझान सरकारी केंद्रों की ओर बढ़ा। इसके बावजूद सरकारी खरीद का आंकड़ा 1,02,691 क्विंटल पर ही सिमट गया जबकि निजी आढ़तियों ने 98,013 क्विंटल सरसों की खरीद की है।
पिछले पांच सालों में एमएसपी और बाजार भाव का अंतर
वर्ष एमएसपी बाजार भाव निजी खरीद सरकारी खरीद
2021-22 4650 5500-6000 3,76,861 00
2022-23 5050 6000-6500 2,13,148 00
2024-25 5650 4900- 5400 30,255 9,23,211
2025-26 5950 5500- 5800 49,706 6,86,941
2026-27 6200 6400-7000 98,013 1,02,691
नोट : एमएसपी और बाजार भाव प्रति क्विंटल के अनुसार हैं और खरीद का आंकड़ा क्विंटल में है।
2024-25 में हुई सबसे अधिक सरकारी खरीद
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह साफ होता है कि जब भी बाजार भाव एमएसपी से ऊपर रहे हैं, सरकारी खरीद का ग्राफ गिरा है। वर्ष 2021-22 और 2022-23 में बाजार भाव काफी ऊंचे थे जिसके चलते सरकारी खरीद शून्य रही थी। इसके विपरीत, वर्ष 2024-25 में जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिर गए थे तब किसानों ने रिकॉर्ड 9 लाख 23 हजार 211 क्विंटल सरसों सरकार को बेची थी। इस वर्ष स्थिति एक बार फिर बदली हुई है और किसान भविष्य में और अधिक दाम बढ़ने की उम्मीद में फसल का भंडारण भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले की करीब दस लाख क्विंटल सरसों अभी भी घरों और गोदामों में स्टोर की हुुई है। शायद किसान इस इंतजार में हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की मांग बढ़ेगी और वे अपनी फसल को और ऊंचे दामों पर बेचकर अच्छा मुनाफा ले सकेंगे।
सरकारी आदेश के बाद एक मई से सरसों की सरकारी खरीद बंद हो चुकी है। अब किसान अपनी बची हुई फसल को केवल निजी आढ़तियों के पास ही बेच सकेंगे। इस सीजन में सरकारी खरीद अपेक्षा से काफी कम रही है।
- विजय कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी, दादरी।