चरखी दादरी। जिले में इस बार तिलहन एवं किसानों के लिए नकदी फसल माने जाने वाली सरसों का उत्पादन 11.50 लाख क्विंटल होने की उम्मीद है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस बार सरसों का रकबा 1.60 लाख एकड़ से ज्यादा है।
किसानों ने अक्तूबर में सरसों की बिजाई कर दी थी। उसके बाद 28 से 30 नवंबर के बीच 17 मिमी बारिश होने पर फसलों का विकास एवं बढ़ोतरी तेजी से हुआ। तब से दो माह तक बारिश नहीं हुई। जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ी जिससे सरसों की फसल पर थोड़ा प्रतिकूल असर पड़ा है। लंबे समय तक कोहरा छाए रहने से पौधों को आवश्यक खुराक यानी पोषक तत्व नहीं मिल पाए। इससे विशेषकर रेतीला एरिया में थोड़ा नुकसान होने का अनुमान है।
हालांकि बाद में एक व दो फरवरी को हुई 12 मिमी बारिश ने इसकी पूर्ति कर दी। अब फरवरी की शुरुआत से ही मौसम साफ बना है। प्रतिदिन धूप खिल रही है। ऐसे में फसली पौधों का विकास सही ढंग से हो रहा है। अगर कटाई तक मौसम अनुकूल बना रहा है और तापमान सामान्य से ज्यादा नहीं रहा तो फसल का पकाव बढि़या से हो सकेगा। इसका असर प्रति एकड़ औसत पैदावार पर पड़ना स्वाभाविक है।
जिले में सरसों का कुल बिजित रकबा 1.60 लाख एकड़ से ज्यादा है। आमतौर पर सरसों की प्रति एकड़ क्षमता औसत पैदावार नौ क्विंटल तक मानी जाती है। कई बार उत्तम किस्म का बीज मिलने, समय पर सिंचाई और मौसम अनुकूल रहने पर प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक हो सकती है। अगर सर्दी से हुए थोड़े नुकसान को देखते हुए आकलन किया जाए तो प्रति एकड़ सात क्विंटल की पैदावार होना सामान्य है। ऐसे में जिले में सरसों का औसतन कुल उत्पादन 11.50 लाख क्विंटल पार करने की उम्मीद है।
सरसों की अनुमानित पैदावार 10 क्विंटल तक होती है जबकि प्रति एकड़ औसत निकाली जाए तो यह छह से सात क्विंटल तक हो पाती है। इसके लिए अब पकाव तक मौसम फसलों के अनुकूल रहने की जरूरत है। किसान फसलों की नियमित देखरेख करें। रोग आदि लगने पर कृषि अधिकारियों से परामर्श लें। इस बार सरसों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। ठंड से इतना नुकसान होने की बात नहीं है। - डॉ. चंद्रभान श्योराण, कृषि विशेषज्ञ, चरखी दादरी।