चरखी दादरी। शहर में पशु डेयरी चलाने वालों से नगर परिषद ने शुल्क वसूलने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सभी डेयरी संचालकों का पंजीकरण किया जाएगा और इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। आवासीय बस्तियों में इस समय 100 पशु डेयरी चल रही हैं और उपायुक्त प्रीति के निर्देशों पर नगर परिषद ने प्रत्येक डेयरी का पंजीकरण करने का फैसला लिया है।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि डेयरियों के कूड़ा-कचरा पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कैटल डंग पॉलिसी बनाई हुई है। इस पॉलिसी के तहत डेयरियों से निकलने वाले गोबर व कचरे का निपटान डेयरी मालिक स्वयं करेगा और उसे नालियों में नहीं बहाया जाएगा। उन्होंने बताया कि डेयरियों का गोबर नालियों में बहाए जाने की वजह से सीवरेज सिस्टम ठप हो जाता है और नालियां अवरूद्ध हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा गोबर को नालियों में बहाए जाने के लिए बेतहाशा पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी होती है। उन्होंने बताया कि गोबर व डेयरी के कचरे से खाद भी बनाई जा सकती है या इसे खेतों में डाला जा सकता है। कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि सर्वे पूरा हो जाने के बाद शहर में चलाई जा रही सभी डेयरियों का पंजीकरण किया जाएगा। जो डेयरी मालिक गोबर आदि कचरे का अपने स्तर पर निपटाए जाने का इंतजाम नहीं करेगा, उससे हर महीने नगर परिषद शुल्क वसूल करेगी।
- प्रतिदिन 7 टन गोबर पहुंचता है नालियों और सीवर लाइनों में
इस समय शहर में सौ से अधिक डेयरियां आवासीय क्षेत्र में चलाई जा रही हैं और रोजाना सात टन से अधिक गोबर नालियों व सीवरेज लाइनों में बहाया जाता है। इस कारण शहर में दूषित पानी की निकासी चरमरा गई है। उम्मीद है कि नगर परिषद की इस कार्रवाई के बाद डेयरी संचालकों पर कुछ लगाम लगाई जा सकेगी। ये डेयरी संचालक रजिस्ट्रेशन होने के बाद शुल्क अदा नहीं करेंगे तो इनके व्यवसाय का शहरी क्षेत्र में संचालन बंद करवा दिया जाएगा।
- बेसहारा पशुओं को पकड़ने की भी योजना
राजेश वर्मा ने बताया कि शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर आवंटित कर दिया है। जितने भी गाय और सांड़ दादरी शहर में घूम रहे हैं, इनको पकड़कर गोशालाओं में छुड़वाया जाएगा। उन्होंने बताया कि बंदर पकड़ने के लिए दस दिन के बाद ठेकेदारों की निविदाएं खोली जाएंगी।
डेयरियों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। शहर में चल रही सभी डेयरियों का नगर परिषद पंजीकरण करेगी और जो गोबर व कचरे का निपटान अपने स्तर पर नहीं करेगा, उससे शुल्क वसूला जाएगा। शुल्क देने में आनाकानी करने वाले को डेयरी का संचालन नहीं करने दिया जाएगा।
-राजेश वर्मा, ईओ, नगर परिषद