फोटो-16 पंप हाउस पर लगीं मोटरें। संवाद
- हर साल घटती है पंप व मोटरों की उठान क्षमता, मानसून सीजन के मद्देनजर सिंचाई विभाग को ध्यान देने की जरूरत
- जिले में हैं करीब 75 नहरें, माइनर व सब माइनर, मानसून सीजन में चलता है करीब तीन माह तक पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मानसून सीजन में नहरों में लगातार तीन माह तक पानी बहता है। बारिश के पानी को नहरें ही ज्यादा झेल पाती हैं। इसे देखते हुए जिले की करीब 75 कैनाल, डिस्ट्रीब्यूटरी, माइनर व सब माइनरों के पंप हाउसों पर लगीं 350 पंप मोटरों की उठान क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
सभी मोटरों व बिजली सिस्टम की मरम्मत करवाने की जरूरत है। ताकि, अचानक उठान ठप न होने पाए। वहीं, कई बार पीछे से अचानक ज्यादा मात्रा में पानी छोड़ना पड़ जाता है, इसलिए मोटरें दुरुस्त होनी जरूरी है। बिजली आपूर्ति ठप होने पर भी कई बार नहर ओवरफ्लो हो जाती है।
इस समय करीब 350 पंप मोटरों में से 150 की मरम्मत की जरूरत बनी हुई है। जिले की नहरों की क्षमता 1000 क्यूसेक पानी से अधिक है। सरकार ने जिले में 45 साल पुराने पंप व मोटर आदि पर 31 करोड़ का बजट खर्च किया था। जिले में मेन पंप हाउस लोहारू कैनाल, बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, बौंदकलां, कितलाना, पिचोपा कलां व कटेसरा आदि शामिल हैं।
- लोहारू नहर पर हैं 32 पंपसेट
मेन लोहारू कैनाल पर 32 पंप सेट हैं। इन पंपसेट के लिए अलग- अलग पंप हाउसों पर 2023 में बिजली के नए 18 ट्रांसफार्मर भी लगाए गए थे। इसी प्रकार, बरसाना के समीप पंप हाउस पर 16 पंप एवं मोटरें लगी हुई हैं। बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी पर सात पंप सेट हैं। इनकी उठान क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। शुरुआत में पंप मोटर की पानी उठान क्षमता 20 से 25 क्यूसेक तक थी।
- इधर...शहर की स्ट्रॉम वॉटर लाइन की नहीं हुई सफाई
मानसून सीजन के मद्देनजर जनस्वास्थ्य विभाग ने अब तक स्ट्रॉम वाटर लाइन की सफाई नहीं कराई है। यह लाइन करीब एक साल पहले ही डाली गई है। इस पर करीब पंद्रह करोड़ का बजट खर्च हुआ है। मानसून सीजन में इस लाइन के जरिये वार्डाें का पानी पहले डुंगरवाला जोहड़ पर और उसके बाद समसपुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाना है।
वर्सन:
विभाग मानसून की तैयारियों में जुटा है। सभी नहरों के पंप एवं मोटर अपडेट किए जा रहे हैं। मानसून सीजन में पानी की उठान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। मानसून से निपटने के लिए 15 जून से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
-वेदपाल सांगवान, मैकेनिकल एक्सईएन, सिंचाई विभाग