सरकार और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप सोमवार को छह महीने बाद स्कूल खुले। कोरोना के डर के चलते जिले के ज्यादातर राजकीय स्कूलों में विद्यार्थी नहीं पहुंचे, जबकि निजी स्कूलों में भी विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रही। विद्यार्थियों के न पहुंचने पर ज्यादातर स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई ही करवाई गई। प्रबंधकों के अनुसार शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सरकार की गाइडलाइन का पालन करते स्कूलों में तमाम प्रबंध किए गए हैं, लेकिन पहले दिन विद्यार्थी कम रहने से कक्षाओं में पढ़ाई नहीं हो पाई।
चरखी दादरी जिला में 70 उच्च और 50 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। इसके अलावा करीब पौनेे दो सौ निजी स्कूल भी हैं। कोरोना महामारी के चलते 25 मार्च से लॉकडाउन लागू गया था, लेकिन उससे पहले 19 मार्च से ही स्कूलों को बंद कर दिया गया था। शिक्षा बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं भी पूरी नहीं हो सकी थी। उसके बाद अब सोमवार से जिला के स्कूल सरकार के निर्देश पर आंशिक तौर पर खोले गए हैं ताकि बच्चे स्कूलों में जाकर शिक्षक से अपनी शिक्षण संबंधी कठिनाइयों को दूर कर सके और उनका पाठयक्रम पिछड़ने न पाए। सोमवार को जब पहले दिन स्कूल खुले तो कई विद्यार्थियों को अभिभावक स्कूल छोड़ने पहुंचे। गेट पर पहुंचते ही विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद संबंधित टीचर के पास विद्यार्थी को शिक्षण समस्याएं दूर करने के लिए कमरों में भेज दिया गया। इस दौरान छात्र और शिक्षक मास्क पहने हुए थे।
क्लास रूम में एक बेंच छोड़कर तैयार किया सीटिंग प्लान
स्कूलों में क्लासरूम में एक बेंच छोड़कर छात्र के बैठने की व्यवस्था की गई, ताकि सामाजिक दूरी बनी रहे। बच्चों को लंच बॉक्स व पानी की बोतलें को आपस में शेयर करने से रोका गया। कमरों को सैनिटाइज किया गया है। स्कूल मुखिया की ओर से अभिभावकों की ओर से सहमति पत्र भी लिए जा रहे हैं।
अध्यापकों के कोरोना टेस्ट की प्रक्रिया जारी
सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप स्कूलों में टीचर और अन्य स्टाफ सदस्यों की कोरोना जांच की प्रक्रिया जारी है। शहर मेें वैश्य ब्वायज, वैश्य गर्ल्स स्कूल और बौंदकलां स्थित आदर्श स्कूल में अध्यापकों के कोरोनो टेस्ट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
मंगलवार को छात्र संख्या बढने की संभावना है। स्कूल भवन को सैनिटाइज करवा दिया गया है। गेट पर ही स्क्रीनिंग का कार्य किया जाएगा। पहले दिन कक्षाएं सुबह नौ से एक बजे तक लगाई गई। स्टाफ सदस्यों द्वारा बच्चों की विशेष निगरानी रखी गई, ताकि सामाजिक दूरी की पालना होती रहे।
नवीन श्योराण, प्रधानाचार्य, एपीएस स्कूल दादरी
पहले दिन स्कूल में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही। स्कूल पहुंचने वाले छात्राओं और स्टाफ सदस्यों की पहले स्क्रीनिंग की गई और इसके बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। स्कूल के सभी कमरों को सैनिटाइज करवाया दिया गया है। अभिभावकों से सहमति पत्र भी लिए जा रहे हैं।
रामकिशन श्योराण, प्रबंधक, आदर्श स्कूल
सोमवार को स्कूल में कक्षाएं नहीं लगाई गई, क्योकि सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। मंगलवार से छात्रों को स्कूल में बुलाया गया है। नौवीं से बारहवीं कक्षा तक 90 प्रतिशत अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सहमति पत्र स्कूल को सौंप दिया है। स्कूल के सभी शिक्षकों के कोरोना टेस्ट हो चुके हैं।
कृष्ण यादव, प्राचार्य, आदर्श स्कूल बौंद कलां
पहले दिन स्कूल आने पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। स्कूल खुलना बहुत जरूरी है क्योकि क्लासरूम की पढ़ाई के बिना पाठ्यक्रम को पूरा करना मुश्किल है। ऑनलाइन पढ़ाई से पूरा पाठ्यक्रम कवर नहीं हो पाएगा। बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने में शिक्षक की गाइडलाइन जरूरी है।
रोहित, छात्र, बारहवीं कक्षा
करीब छह माह से छात्र स्कूल से दूर हैं। ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प सही है, लेकिन क्लासरूम में बैठकर कोई टॉपिक ज्यादा अच्छे से समझ में आता है। परीक्षा की तैयारी में शिक्षक की गाइडलाइन काफी कारगर साबित होती है।
विनय, छात्र, ग्यारहवीं कक्षा
राजकीय स्कूलों में पहले दिन छात्रों की हाजिरी 10 प्रतिशत रही। स्कूल भवन को सैनिटाइज करने के लिए व्यवस्था कर दी गई है। सरकार की ओर से ग्रांट आई है। स्कूल मुखिया को सामाजिक दूरी के पालन के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। फिलहाल स्कूल लगाने की कोई समय सीमा नहीं है। विद्यार्थी स्कूल में आकर अपनी शिक्षण संबंधी कठिनाइयों को दूर कर सकता है।
जलधीर सिंह कलकल, खंड शिक्षा अधिकारी
Most of the schools did not reach the students, teachers got their studies done online- फोटो : CharkhiDadri