चरखी दादरी। पिछले 10 वर्षों में जिले में मानसून फीका ही रहा है। एक दशक में सिर्फ एक बार ही जिले में औसत बारिश हुई है। जिले का 80 प्रतिशत कृषि योग्य क्षेत्र मानसून पर ही निर्भर करता है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मानसून में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।
जिले का कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है और करीब 68 हजार किसान हैं। रबी व खरीफ सीजन की तकरीबन सभी प्रकार की फसलों की खेती होती है। करीब 30 प्रतिशत बरानी क्षेत्र तो पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करता है। ऐसे में जिले में मानसून सीजन में औसत 550 एमएम बारिश की जरूरत होती है। अगर पिछले एक दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ 2016 में 576 एमएम बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य सालों में औसत से कम ही बारिश हुई है।
मानसून को लेकर किसानों को काफी उम्मीदें हैं। अगर मानसून अच्छा है तो खरीफ के साथ रबी की फसलों की बिजाई भी आसान हो जाती है। मानसून की बारिश का समय आमतौर पर सितंबर अंतिम सप्ताह तक होता है। ऐसे में बारिश से खेतों में अक्तूबर के अंत तक नमी बनी रहती है। संवाद
इन फसलों की होती है खेती
जिले में रबी की फसलों में सरसों, गेहूं, चना, जौ, मेथी की खेती की जाती है, जबकि खरीफ की फसलों में बाजरा, ज्वार, ग्वार, मूंग, मोठ,अरहर,तिल, सोयाबीन आदि की खेती की जाती है। जिले में करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रेतीला है। इस क्षेत्र में खरीफ की फसलें तो बारिश पर ही निर्भर करती हैं। जिले के करीब 15 प्रतिशत एरिया में ही नहरी पानी से सिंचाई होती है। नहरों में 24 दिन में 16 दिन के लिए पानी छोड़ा जाता है।
किसान बोले : ट्यूबवेल भी देने लगे जवाब
किसान माडूराम, संजय कुमार, राम सिंह, चांद सिंह व हवासिंह मोठसरा का कहना है कि जिले में मानसून की बारिश कई साल से बेहद कम मात्रा में हो रही है। सावन-भाद्रपद मास में भी सूखा बना रहता है। बोरिंग ट्यूबवेल भी अब जवाब देने लगे हैं।
वर्ष 2014 से 2023 तक बारिश
वर्ष- बारिश
2014- 207 एमएम
2015- 309 एमएम
2016- 576 एमएम
2017 - 315 एमएम
2018 - 311 एमएम
2019- 183 एमएम
2020- 289 एमएम
2021= 512 एमएम
2022- 347 एमएम
2023- 352 एमएम
मानसून सीजन में अच्छी बारिश होना जरूरी है। बारिश के पानी से ही जमीनी वाटर रिचार्ज होता है। इस बार मानसून की अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। - जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी