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Charkhi Dadri News: 85 साल से रघुनाथ का परिवार कायम रखे हुए है सेना भर्ती की परंपरा

Tue, 16 Jan 2024 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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 चरखी दादरी के रघुनाथ अपनी पत्नी भगवानी देवी के साथ। 
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जगदीप सिंह
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चरखी दादरी। देशसेवा के मामले में मिसरी निवासी रघुनाथ के परिवार ने नजीर पेश की है। सेना में जाकर देश सेवा करने की परंपरा ये परिवार 85 साल से कायम रखे हुए है। इस परिवार की चार पीढ़ी सेना में भर्ती होकर देश को 15 सैनिक दे चुकी हैं। इस परिवार का देश व सेना के प्रति लगाव चर्चा का विषय बना है।
रघुनाथ के परिवार की सेना में भर्ती होने की परंपरा वर्ष 1939 में शुरू हुई थी जो अब तक कायम है। खास बात ये है कि परिवार के बुजुर्ग अगली पीढ़ी को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते हैं। इस परिवार में सबसे पहले रघुनाथ यादव वर्ष 1939 में सेना में भर्ती हुए थे। वो 1945 में सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद उनके बेटे प्रकाशचंद यादव मात्र साढ़े 17 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए और वर्ष 1991 में वो सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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उनके छोटे भाई कवंर सिंह यादव ने भी टैंक ऑर्म्डकोर में 19 साल 7 माह तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद अगली पीढ़ी में प्रकाशचंद का बेटा कृष्ण सेना में भर्ती हुआ। वहीं, कृष्ण के बाद उनका बेटा संदीप ने सेना ज्वाइन की। हालांकि सेना में तीन साल की नौकरी के बाद संदीप की एक हादसे में मौत हो गई थी। वहीं, प्रकाशचंद के छोटे भाई कंवर सिंह के पुत्र रमेश भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुका है। रमेश की बेटी श्रवंता एयरफोर्स में विंग कमांडर हैं और उनकी तैनाती फिलहाल अंबाला में है।

- रघुनाथ के तीन भाई भी रह चुके सैनिक
स्वर्गीय पूर्व सैनिक रघुनाथ के बड़े बेटे प्रकाशचंद यादव ने बताया कि उनके पिता के अलावा उसके ताऊ शिवलाल, सूरजन सिंह, अभय सिंह भी सेना में रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के पंद्रह सदस्य अब तक सेना ज्वाइन कर चुके हैं। आगे भी इस परंपरा को कायम रखने का प्रयास रहेगा।
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... जब गंवानी पड़ी थी उंगली
पूर्व सूबेदार प्रकाशचंद यादव ने सेना से जुड़ी पुरानी यादें भी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में मुक्ति वाहिनी सेना में भर्ती थे। उस दौरान उनको 5 गोले एकसाथ दागने के लिए बोला गया था। जल्दबाजी में गोला दागने के दौरान उनकी एक उंगली चपेट में आ गई थी।
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