चरखी दादरी। शहर से सटे गांव रावलधी स्थित वन विभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर मियावाकी पद्धति से घना वन तैयार किया जा रहा है। जापान की इस पद्धति के तहत कम क्षेत्र में अधिक संख्या में पौधे लगाए जाते हैं जिससे सामान्य पौधरोपण की तुलना में वन तेजी से विकसित होकर घना स्वरूप लेता है। वन विभाग की ओर से प्रस्तावित क्षेत्र में करीब 10 हजार पौधे लगाने की योजना है। इनमें विभिन्न प्रजातियों के बड़ी संख्या में औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे वन विभाग की ओर से जिले के गांव रावलधी स्थित साढ़े 15 एकड़ जमीन से डेढ़ एकड़ पर मियावाकी पद्धति से पौधरोपण कर रहा है। विभाग के अधिकारियों अनुसार मियावाकी वन तैयार होने के बाद क्षेत्र में हरियाली का घनत्व बढ़ेगा। इससे स्थानीय वातावरण को शुद्ध रखने, धूल और प्रदूषण के प्रभाव को कम करने तथा पक्षियों और छोटे जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। आरक्षित वन क्षेत्र में यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मियावाकी वन में नीम, आंवला, अर्जुन, बेल, जामुन, करंज, गिलोय, तुलसी और एलोवेरा जैसी उपयोगी औषधीय प्रजातियां लगाए जाने की योजना है। नीम को पारंपरिक रूप से औषधीय गुणों वाला पौधा माना जाता है। इसकी पत्तियां, छाल और बीज विभिन्न पारंपरिक उपचारों में उपयोग किए जाते हैं। आंवला विटामिन-सी से भरपूर फल है और आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन, प्रतिरोधक क्षमता और बालों से जुड़े पारंपरिक उपचारों में किया जाता है।
आयुर्वेद में अर्जुन की छाल का होता है विशेष महत्व
अर्जुन की छाल का आयुर्वेद में विशेष महत्व है और इसे पारंपरिक रूप से हृदय स्वास्थ्य से जुड़े उपचारों में इस्तेमाल किया जाता है। बेल का फल पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। गिलोय का उपयोग आयुर्वेद में प्रतिरोधक क्षमता और बुखार संबंधी पारंपरिक उपचारों में किया जाता है। तुलसी को भी औषधीय महत्व वाली प्रमुख वनस्पति माना जाता है, जबकि एलोवेरा का उपयोग त्वचा संबंधी देखभाल और पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है।
कम जगह में ज्यादा हरियाली, तेजी से तैयार होगा वन
मियावाकी पद्धति में पौधों को अपेक्षाकृत कम दूरी पर लगाया जाता है और मिट्टी को पौधों की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाता है। शुरुआती वर्षों में पौधों की देखभाल के बाद वन अपने स्तर पर विकसित होने लगता है। इससे सीमित भूमि में भी घनी हरियाली विकसित की जा सकती है। वन विभाग की इस पहल से रावलधी क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में लोगों को स्वच्छ और बेहतर पर्यावरण मिलने की उम्मीद है
वर्जन
गांव रावलधी में हमारी लगभग साढ़े 15 एकड़ आरक्षित जमीन है, इसी जमीन में से ढाई एकड़ पर मियावाकी वन लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें कई प्रजातियों के पौधे लगाए जाने हैं, जिनमें अधिकतर औषधीय व लंबी उम्र के पौधे शामिल किए गए हैं।हेमंत पारीक, जिला वन राजिक अधिकारी