चुनावी पेज मुद्दा::
हुडा ने 50 एकड़ जमीन के बदले मांगे थे 227 करोड़, घसोला पंचायत ने 49 रुपये सालाना लीज पर दी जमीन, सरकार से मिल चुकी स्वीकृति, भवन निर्माण के लिए नक्शा व एस्टीमेट तैयार होने के साथ बजट की दरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के छह माह बाद भी दादरी जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। मौजूदा स्थिति देखें तो जमीन चिह्नित करने के साथ ही सरकार की स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया सिरे चढ़ी है। अभी ड्राइंग और एस्टीमेट समेत बजट मिलना बाकी है। इस चुनाव में यह बड़ा मुद्दा रहेगा।
वैसे तो सरकार ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज निर्माण की घोषणा पहले से की है। लेकिन, फरवरी 2024 के बजट में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चरखी दादरी जिले में मेडिकल कॉलेज निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इसके बाद दोनों हलकों के विधायक और सांसद से मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए साइट का प्रस्ताव मांगा गया।
सांसद धर्मबीर सिंह ने बिरहीकलां का जबकि दादरी विधायक सोमबीर सांगवान ने छपार गांव का प्रस्ताव भेजा। बाढड़ा विधायक नैना चौटाला ने घसोला गांव में मेडिकल कॉलेज निर्माण की मांग की। लंबी जद्दोजहद के बाद घसोला में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 49 एकड़ जमीन चिह्नित हो पाई। हालांकि, अभी कॉलेज भवन निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार होने के अलावा बजट की दरकार है। यह प्रक्रिया चुनाव के बाद शुरू हो पाएगी। वहीं, इस चुनाव में दादरी जिले के लिए यह बड़ा मुद्दा रहेगा।
दादरी जिले को इस समय मेडिकल कॉलेज की सख्त जरूरत है। फिलहाल, गंभीर मरीजों को रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। हिसार व गुरुग्राम में लोग उपचार करवाने के लिए विवश हैं। इससे आर्थिक और शारीरिक परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार पीजीआई पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ देता है।
33 साल के लिए लीज पर दी थी पंचायत ने जमीन
सूत्रों की मानें तो घसोला ग्राम पंचायत ने शिक्षा-स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए 49 एकड़ जमीन 33 साल की लीज पर दी है। इसके बदले पंचायत प्रति एकड़ एक रुपये प्रतिवर्ष शुल्क लेगी। इस लिहाज से एक साल का शुल्क 49 रुपये और 33 साल का 1617 रुपये बनेगा। वहीं, हुडा (हरियाणा अर्बन डेवेलपमेंट अथॉरिटी) ने 50 एकड़ जमीन के बदले 227 करोड़ रुपये मांगे थे।
- सिविल अस्पताल में सुविधाओं का अभाव
इस समय जिला स्तरीय सिविल अस्पताल में उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं। अस्पताल में कई प्रकार के असाध्य रोगों के इलाज की सुविधा नहीं है। बड़े स्तर के ऑपरेशन की सुविधा भी नहीं है। इससे लोगों को हिसार, गुरुग्राम व रोहतक जाना पड़ता है। विभिन्न प्रकार के रोगों के विशेषज्ञ भी यहां तैनात नहीं हैं। रोगों की जांच के लिए बड़े स्तर की मशीनें भी नहीं हैं। ऐसे में गंभीर बीमारियाें की बड़े महानगरों में जांच करवानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां विशेषज्ञ भी तैनात हो सकेंगे और सभी प्रकार के रोगों के चिकित्सक भी मिल जाएंगे।
वर्सन:
घसोला में मेडिकल कॉलेज बनवाने की हमने पूरी लड़ाई लड़ी। अपने कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दिलाई। अब भवन निर्माण कार्य शुरू करवाने के लिए औपचारिकताएं पूरी करनी बाकी हैं। घसोला गांव शहर से सटा है। एनएच-152 डी से भी चयनित साइट की दूरी कम है।
-नैना चौटाला, विधायक, बाढड़ा
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घसोला गांव में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए चिह्नित जगह। संवाद
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विधायक नैना चौटाला।