चरखी दादरी। जिले के गांव मकड़ाना स्थित वॉलीबाल नर्सरी में युवा अपना खेल कौशल निखार रहे हैं। पिछले पांच साल में नर्सरी के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्तर पर 32 पदक जीते हैं। नर्सरी के पांच खिलाड़ी राष्ट्रीयस्तर पर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। अब उन्हें अंतरराष्ट्रीयस्तर का खिलाड़ी बनाने के लिए अभ्यास करवाया जा रहा है।
कोच अशोक अहलावत ने बताया कि उन्हें वर्ष 2018 में खेल विभाग में कोच की नौकरी मिली थी और वर्ष 2019 में उन्होंने इस नर्सरी को ज्वाइन किया। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे सीआरपीएफ टीम के कप्तान और कोच भी रह चुके हैं। वर्ष 2019 से 2023 के बीच वे तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी दो रजत और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं। उन्होंने कई बार हरियाणा टीम के कोच की भूमिका भी निभाई है।
कोच अशोक ने बताया कि नियुक्ति के समय अकादमी में खिलाड़ियों की संख्या 40 थी। यह संख्या अब भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि वे खिलाड़ियों को वॉलीबाल के प्रेरित कर रहे हैं। जब भी किसी स्कूल, कार्यक्रम या कहीं पर भी कोई अधिक लंबाई वाला युवक मिलता है तो वे उसे वॉलीबाल खेलने के लिए कहते हैं। इसके साथ ही वे जरूरत पड़ने पर युवाओं के अभिभावकों से भी बात कर उन्हें वॉलीबाल में कॅरिअर बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
5 राष्ट्रीय और 10 राज्यस्तरीय खिलाड़ी
कोच अशोक अहलावत ने बताया कि नर्सरी में पांच राष्ट्रीय और दस राज्यस्तर के खिलाड़ी हैं। नर्सरी के अलावा 15 अन्य खिलाड़ी भी यहां अभ्यास के लिए आ रहे हैं। पिछले पांच साल से खिलाड़ी हरियाणा टीम में अपना अच्छा प्रदर्शन कर गांव का नाम भी रोशन कर रहे हैं। कोच अशोक ने बताया कि अक्षय, रोहित, सुक्रम, अंकित और जतिन राष्ट्रीयस्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर पदक जीत चुके हैं। अब आगे इन्हें अंतरराष्ट्रीयस्तर पर ले जाने की तैयारी है। उनके इस लक्ष्य में सहयोग करने के लिए खिलाड़ियों को मेहनत करनी होगी।
ये है नर्सरी में चयन की प्रक्रिया
कोच अशोक ने बताया कि नर्सरी में चयन के लिए सरकार के मानदंडों का प्रयोग किया जाता है। इस खेल के लिए लंबाई अधिक होनी बहुत जरूरी है और लंबाई के आधार पर खिलाड़ियों का चयन किया जाता है। नर्सरी में दाखिला भी निशुल्क दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सभी खिलाड़ी सुबह छह से आठ बजे और शाम को 4:30 से 7:30 बजे तक खेल अभ्यास करते हैं।
खिलाड़ी बोले : सुविधा मिली तो बना पाए पहचान
इस नर्सरी में खेलते हुए मैंने राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। मेरी सफलता में कोच अशोक और नर्सरी का अहम योगदान है। मेरे साथ गांव अन्य खिलाड़ी भी यहां से प्रशिक्षण ले चुके हैं। - सुक्रम, खिलाड़ी
खेल में अपना भविष्य तलाशना आज के समय की जरूरत बन गई है। केवल नौकरी से देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा। उन्हें खेल क्षेत्र में आगे आना चाहिए। नर्सरी में अभ्यास अभी जारी है। - जतिन, खिलाड़ी
नर्सरी संचालन में गांव के खिलाड़ियों और ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। अब सभी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैयार करना ही उनका लक्ष्य है। वे अपने स्तर पर खिलाड़ियों को खेल के लिए प्रोत्साहन देकर उनके भविष्य को संवारने के लिए प्रयासरत हैं। - अशोक अहलावत, वॉलीबाल कोच।