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टिड्डी दल कमजोर पड़ने पर किसानों को राहत मिलने की उम्मीद

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हवा के रूख के साथ जिला में ट्डिडी दल के फिर से प्रवेश की संभावना बनी हुई है। हालाकि स्प्रे आदि के प्रभाव से टिड्डी दल कमजोर पड़ा है। मारे जाने पर इनकी संख्या में भी कम आई है। हजारों की संख्या में टिड्डी मारी गई है। बुधवार सांय टिड्डी दल ने कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचाया था। कृषि विभाग की दादरी, बाढड़ा की टीमें लगातार इस दल पर निगरानी रखे हुए हैं। किसान भी सतर्क बने हुए हैं। जिला मेें बुधवार सांय को दूसरी बार टिड्डी का प्रवेश हुआ था। हवा के रूख के साथ टिड्डी दल दिशा तय करता है। किसान खेतों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। कृषि विभाग ने गांव स्तर पर स्पे्र के लिए टै्रक्टर तैयार कर रखे हैं ताकि अचानक जरूरत पडने पर इनकी मदद ली जा सके। स्प्रे की मदद से टिड्डी दल पर जल्दी काबू पाया जा सकता है। खंड कृषि विकास अधिकारी रमेश रोहिल्ला का कहना है कि काफी संख्या में टिड्डी मर चुकी हैं। अब यह दल कमजोर पड़ गया है। दल में संख्या कम हो गई है। दल के कमजोर पडने पर इनकी सक्रियता कम होने लगी है। उनका कहना है कि इनकी प्रजनन प्रक्रिया भी जारी रहती है।इस समय खेतों में कपास, ज्वार, बाजरा की फसलें खड़ी हैं। टिड्डी दल पेड़ों के पत्तों को भी खा जाता है। जिला का कुल रकबा 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। जिला में खरीफ सीजन में कपास, बाजरा, ज्वार, धान, मूंग व ग्वार की फसलें ज्यादा मात्रा में होती हैं। इस बारिश होने पर खेतों में हरियाली बनी हुई है।
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