वार्ता के बाद बाहर आए डीसी एसएल पूनिया, एसपी बीएस राणा और किसानों का प्रतिनिधिमंडल।
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एसपी बलवान सिंह राणा से बातचीत करता किसानों का प्रतिनिधिमंडल।
कोरोना के चलते किसानों का 414 दिन पुराना धरना स्थगित
- कोडीसी और एसपी के प्रस्ताव पर 16 गांवों के किसानों ने खत्म किया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। नेशनल हाईवे ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए अधिगृहित की जाने वाली भूमि का मुआवजा राशि बढ़ाने को लेकर पिछले 414 दिन से धरने पर बैठे किसानों ने वीरवार को इसे समाप्त करने की घोषणा की। कोविड के संक्रमण व लॉकडाउन के बीच उपायुक्त ने किसान नेताओं से इस धरने को खत्म करने का आग्रह किया था। जिसके बाद ये फैसला लिया गया। प्रशासन ने किसानों के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।
ज्ञात रहे कि चरखी दादरी जिले से गुजरने वाले एनएच-152 डी में 17 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है। सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि से ये किसान संतुष्ट नहीं थे। किसानों ने 26 फरवरी 2019 को रामनगर गांव के समीप अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। इसके बाद धरनास्थल पर किसानों का कारवां बढ़ता ही चला गया। मामला सीएम दरबार के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक जा पहुंचा था। करीब 14 माह तक ये किसान धरने पर डटे रहे और इस दौरान उनकी सरकार के साथ दस से अधिक बैठकें हुई। इन बैठकों में भी कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार और प्रशासन के आग्रह के बावजूद ये किसान धरना खत्म करने को तैयार नहीं हुए।
वीरवार को डीसी एसएल पूनिया और एसपी बीएस राणा ने किसानों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए लघु सचिवालय बुलाया। करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों में बैठक चली और कक्ष से बाहर आते ही किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने धरना समाप्ति का एलान कर दिया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल विनोद मौड़ी, अनुप फौगाट, रामनिवास, सुखबीर, कलीराम, कृष्ण, सोनू, राकेश, महावीर, रविंद्र व नसीब ने बताया कि प्रशासन ने उनकी सभी जायज मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए भी किसान धरना समाप्ति के लिए तैयार हुए हैं।
चार किसानों की हो चुकी मौत
रामनगर धरने की अगुवाई कर रहे अनुप फौगाट और विनोद मौड़ी ने बताया कि 14 माह तक किसानों ने शांतिपूर्वक धरना दिया। इस दौरान कोई हिंसक गतिविधि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कम मुआवजा राशि से मिलने से सदमे में गए चार किसानों की मौत भी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खातीवास गांव निवासी जगदीश और धर्मपाल, ढाणी फौगाट निवासी रामअवतार और दातौली निवासी बिल्लू की मौत अवसाद के चलते हुई है।
कई बार बनी टकराव की स्थिति, प्रशासन से हुई 60 से अधिक बैठकें
जिला प्रशासन पिछले 14 माह से नियमित अंतराल पर किसानों से वार्ता करता रहा लेकिन वीरवार से पहले किसी भी वार्ता में मामला सिरे नहीं चढ़ा। 14 माह के अंदर किसानों के प्रतिनिधिमंडल से जिला प्रशासन 60 से अधिक बैठकें कर चुका है। वहीं, किसानों ने शहर में ट्रैक्टरों के काफिलों के साथ कई बार मार्च भी किया और इस दौरान टकराव की भी स्थिति बनी। हालांकि प्रशासन और किसान कभी आमने-सामने नहीं हुए और किसानों के प्रदर्शन के दौरान दोनों तरफ से शब्दबाण जरूर चले।
रेलवे ट्रैक पर उतरने की भी बनी थी स्थिति
किसान नेता रमेश दलाल भी रामनगर धरना कमेटी के लगातार संपर्क में रहे थे। करीब छह माह पहले किसानों ने प्रदेश में ट्रेनें रोकने का भी एलान कर दिया था जिसके चलते सरकार में बैचेनी बढ़ गई थी। हालांकि सरकार के निर्देशों पर चरखी दादरी जिले में प्रशासन ने कभी किसानों को रेलवे ट्रैक तक नहीं आने दिया। इसके लिए चरखी दादरी के अलावा समीपवर्ती पांच जिलों से भी पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी थी।
किसानों के साथ आज मैंने और डीसी एसएल पूनिया ने बैठक की। कोविड-19 को देखते हुए किसानों ने धरना समाप्ति का एलान कर दिया। किसानों की जो उचित मांगें हैं उन्हें पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
-बलवान सिंह राणा, एसपी, चरखी दादरी
किसानों की जो भी जायजा मांगें हैं उन्हें पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। कोविड-19 को देखते हुए किसानों से धरना समाप्ति की मैंने अपील की थी, जिसे उन्होंने मान लिया। सहयोग के लिए किसान बधाई के पात्र हैं।
-श्यामलाल पूनिया, डीसी, चरखी दादरी