फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: सेवा में लापरवाही पर एलआईसी को बीमा राशि और 10 हजार जुर्माना देने के आदेश

Sat, 07 Feb 2026 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
विज्ञापन
अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल। - फोटो : 1
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने तकनीकी आधार पर क्लेम रोकने को सेवा में कोताही मानते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम को उपभोक्ता को बीमा राशि और जुर्माना अदा करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

दादरी की चंपापुरी कॉलोनी निवासी जय भगवान ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अभियोग दायर कर बताया था कि पत्नी सरोज ने एलआईसी से तीन लाख रुपये की चार बीमा पॉलिसी ली थीं। 13 अगस्त 2022 को पत्नी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। नॉमिनी के तौर पर मृत्यु दावे के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 28 मार्च 2023 को इसे खारिज कर दिया। एलआईसी ने तर्क दिया कि पॉलिसीधारक ने 20 मई 2022 को चारों पॉलिसियों को बहाल करवाते समय एक महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया था। उसी दिन पॉलिसीधारक महिला ने एलआईसी की बहादुरगढ़ शाखा से आठ लाख रुपये की एक नई पॉलिसी भी ली थी, जिसकी जानकारी उन्होंने दादरी शाखा के बहाली फॉर्म में नहीं दी। कंपनी ने इसे धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाने की बात कहते हुए क्लेम रद्द कर दिया था।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कंपनी द्वारा क्लेम रद्द करने का आधार कमजोर और तकनीकी है। आयोग ने कहा कि डिजिटल युग में एलआईसी जैसी संस्था की सभी शाखाएं केंद्रीकृत डेटाबेस से जुड़ी होती हैं। यदि एक शाखा पॉलिसी जारी कर रही है तो दूसरी शाखा को इसकी जानकारी होनी चाहिए। अपनी आंतरिक खामियों के लिए उपभोक्ता को सजा नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही आयोग ने यह भी माना कि किसी दूसरी पॉलिसी का नंबर न बताना कोई भौतिक तथ्य छिपाना नहीं माना जा सकता, जिससे जोखिम की प्रोफाइल बदले। नरयाल ने एलआईसी को आदेश दिए कि वह तीन लाख रुपये की कुल बीमा राशि का भुगतान करें। साथ ही पॉलिसी पर लागू सभी बोनस व अतिरिक्त लाभ भी दें। इसके अलावा क्लेम खारिज करने की तिथि से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करें। वहीं शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में भी पांच हजार रुपये का भुगतान अगले 45 दिन के भीतर करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें