चरखी दादरी। कंप्यूटर के युग में किताबें पढ़ने का दौर मंद पड़ चुका है। धीरे-धीरे किताबों की दुनिया मोबाइल व कंप्यूटर्स में समाहित होती जा रही है। बड़ी बात तो यह है कि किताबों के लिए जिम्मेदारों ने भी सोचना बंद कर दिया है। इसी का नतीजा है कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक के लिए पिछले 11 साल से पुस्कालय शुरू नहीं हो पाए हैं। इसकी फाइलें शिक्षा विभाग की अलमारियों में सिमट की रह गई है।
शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत सभी स्कूलों में लाइब्रेरी खोले जाने का प्रावधान है। पहले तो विभाग ने लेटलतीफी करते हुए करीब नौ साल बाद सर्वे कर 120 राजकीय स्कूलों में लाइब्रेरी खोलने की स्वीकृति के लिए फाइल मुख्यालय भेजी। दो साल बीत जाने पर इस भी स्वीकृति नहीं मिली है और स्थानीय अधिकारी फाइल मंजूरी को लेकर अनभिज्ञता जता रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में अभी तक कोई निर्देश नहीं आए हैं, जैसे ही निर्देश आएंगे वैसे ही अगली प्रक्रिया शुरू दी जाएगी।
एक कमरे में रखे जा रही है पाठ्यक्रम पुस्तकें
इस समय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन नहीं हैं। हर साल पाठ्यक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं। उनको एक कमरे में रखा जाता है और एक शिक्षक को इनकी संभाल के लिए जिम्मेदारी सौंप दी जाती है, लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरुषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं मिलती हैं। विद्यार्थी केवल स्कूली पाठ्यक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
सभी स्कूलों में लाइब्रेरी, खेल मैदान व लैब होना जरूरी
सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था। इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया था। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। सभी स्कूलों में लाइब्रेरी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब, पर्याप्त भवन का होना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए। एक अप्रैल 2010 से शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद से लाइब्रेरी नहीं खुल पा रही है।
जिले के 120 हाई व सेकेंडरी स्कूलों में पुस्तकालय खोलने के लिए विभाग ने सर्वे रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज रखी है। इस संबंध में अभी तक कोई निर्देश नहीं आए हैं। जैसे ही कोई निर्देश आएंगे इस पर काम शुरू करवा दिया जाएगा। जयवीर सिंह, एसडीओ, समग्र शिक्षा (तकनीकी)