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फोटो 26
कादमा गांव में सड़क पर भरे पानी से गुजरते स्कूली विद्यार्थी। संवाद
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- चार जल विशेषज्ञों को सौंपी गई है जिम्मेदारी, बारिश होने पर अटल भूजल पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा डाटा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के 168 में 47 गांवों का मानसून सीजन की बारिश का डाटा अटल भूजल पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसके लिए विभाग के चार जल सूचना विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन गांवों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे होने की वजह से इस पर काम किया जा रहा है। ताकि, इसकी समीक्षा कर आगामी जल संरक्षण की योजना बनाई जा सके।
सिंचाई विभाग की भूजल शाखा ने गांव स्तर पर जल संकेतक बोर्ड लगा रखे हैं। ताकि, ग्रामीण इसके प्रति जागरूक एवं सतर्क रहें। जिले के गांव धनासरी में सर्वाधिक 96 मीटर नीचे पानी है। जिले के खंड बाढड़ा में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है। इन 47 गांवों में अधिकतर बाढड़ा खंड के ही गांव हैं।
इस बार मानसून सीजन में बाढड़ा खंड में सर्वाधिक बारिश हुई है। बारिश से ही भूमिगत जलस्तर ऊपर आने की ज्यादा संभावना बनती है। बारिश के पानी का संग्रहण करने के लिए गांवों मेंं वाटर स्टोरेज टैंक भी बनाए गए हैं। खासकर स्कूल परिसरों मेंं बोरवेल भी बना रखे हैं। ताकि, आसपास का पानी बोरवेल के जरिए जमीन में चला जाए और पानी का स्तर बढ़ जाए।
अब विभाग ने मानसून सीजन में 47 गांवों का बारिश का डाटा एकत्रित करने का काम शुरू किया है। जब भी बारिश होती है, इन गांवों का बारिश का आंकड़ा अटल भूजल पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है। डाटा से गांव स्तर पर जमीनी पानी का पता चलता रहेगा। उसके बाद लोगों को जागरूक किया जाएगा। लोगों को गांव में हुई बारिश एवं जलस्तर के बारे में जानकारी दी जाएगी।
- 10 से ज्यादा जल योद्धा कर रहे लोगों को जागरूक
जिले में 10 से ज्यादा जल योद्धा लोगों को जागरूक करने के काम में लगे हुए हैं। वे लोगों को विभिन्न तरीकों से जागरूक कर रहे हैं। समय-समय पर गोष्ठी एवं कार्यशालाएं गांव स्तर पर आयोजित कर लोगों की जल की उपयोगिता के बारे में समझाया जाता है।
वर्सन
मानसून सीजन में बारिश के पानी का प्रबंधन किया जा रहा है। बारिश का आंकड़ा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है।
-विनायक, भूमिगत जल विशेषज्ञ