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सोडियम की जगह एलईडी लाइटों से जगमगाएंगे शहर के चौराहे और सड़कें

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रोहतक रोड पर लगी सोडियम लाइटें। - फोटो : CharkhiDadri
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शहर की प्रमुख सड़कें और चौराहे अब सोडियम बल्ब की जगह एलईडी बल्ब से जगमगाएंगे। नगर परिषद ने शहर में 750 एलईडी लाइटें लगाने के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने का इंतजार था। चुनाव से पहले एलईउी लाइटें लगाने का प्रोजेक्ट अधर में लटक गया था। अब जाकर नप अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया सिरे चढ़ाते हुए वर्क ऑर्डर जारी कर दिए हैं। अगले एक सप्ताह के अंदर लाइटें बदलने का काम शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में हाई मास्क लाइटें भी शामिल हैं। पुरानी सोडियम लाइटों की जगह यह एलइडी लाइटें लगाई जानी हैं।
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सर्दी के मौसम मेें सड़कों पर अंधेरा छाया रहने से आपराधिक वारदातों का भय रहता है। स्ट्रीट लाइटों के लिए कई बार टेंडर लगाए गए, लेकिन किसी भी एजेंसी द्वारा टेंडर रिसीव न करने पर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पा रहा था। शहर में स्ट्रीट लाइटों की लगातार कमी बनी हुई है और अमर उजाला ने अलग-अलग संस्करणों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। स्ट्रीट लाइटें न होने से रात के समय कालोनियों में अंधेरा छाया रहता है, जिससे चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं का भी अंदेशा बना रहता है। शहर में इस समय चार हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं।
शहर में कुल 21 वार्ड है। इन सभी वार्डों के तहत करीब 60 से अधिक कालोनियां हैं। इन कालोनियों में रात के समय स्ट्रीट लाइटों के जरिए ही रोशनी की व्यवस्था है। कालोनियों के अलावा सार्वजनिक भागों में लगी सैकड़ों लाइटें भी सही कंडीशन में नहीं होने से समय- समय पर इनमें खराबी बनी रहती है। कही लाइटों के स्विच खराब हैं तो कही तारें टूटी पड़ी हैं।
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रोजाना हो जाती है 80 लाइटें खराब
कोहरे एवं बारिश की वजह से शहर में रोजाना 70 से 80 लाइटें खराब हो रही हैं। कालोनियों व शहर के अन्य सार्वजनिक भागों में लाइटें खराब होने से लोगों को रात के समय आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ती है। गलियों में अंधेरा छाया रहता है। हालांकि नगर परिषद की ओर से नियमित रूप से लाइटें ठीक भी की जा रही हैं। लेकिन खराब होने वाली लाइटों की संख्या अधिक बनी रहती है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से ठीक नहीं हो पा रही है। रात के समय अपराधिक घटनाओं का अंदेशा अधिक बना रहता है।
शहर की नई कालोनियों में लाइटों की जरूरत
इस समय शहर की नई कालोनियों में नई लाइटें लगाए जाने की जरूरत है। इन कालोनियों को पिछले दो साल से ही वैधता मिली है। इन नई कालोनियों में करीब 100 से अधिक लाइटों की जरूरत है तथा पुरानी कालोनियों में भी कंडम हो चुकी लाइटों को बदलने की जरूरत है। इन नई कालोनियों में सड़क व सीवरेज का काम भी अभी बाकी है, लेकिन आवासीय बस्ती होने की वजह से स्ट्रीट लाइटों की पहली जरूरत बनी हुई है। क्योंकि कच्चा एरिया होने की वजह से लोगों को खासकर रात के समय आवागमन में अधिक परेशानी होती है।
वार्डों और बाजरों में बदली जाएंगी 600 लाइटें
नगर परिषद का स्ट्रीट लाइटें लगाने का यह प्रोजेक्ट लंबे समय से लटकता आ रहा है। अब नगर परिषद शहर में 750 स्ट्रीट लाइटों को बदलकर नई लगाएगा। 600 एलईडी लाइटें तो वार्डों और बाजारों में लगाई जानी हैं। इनके अलावा हाई मास्क लाइटें भी लगनी हैं। इसके लिए वर्क ऑर्डर हो गए हैं। जल्द ही यह काम शुरू होने की उम्मीद है।
250 की जगह 90 वॉट का लगेगा बल्ब, बिजली भी बचेगी
नप अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल शहर के चौराहों और प्रमुख सड़कों पर 250 वॉट की सोडियम लाइटें लगी हैं। इनकी जगह 90 वॉट के एलईडी बल्ब लगाए जाने हैं। एलईडी बल्ब सोडियम लाइटों के मुकाबले रोशनी अधिक देंगे, जबकि बिजली की खपत आधी ही होगी।
नगर परिषद के एक्सईएन सुंदर श्योराण ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के वर्क ऑर्डर हो गए हैं। जल्द ही शहरवासियों को स्ट्रीट लाइटों की समस्या से निजात मिल जाएगी। हर वार्ड की गली व बाजार रोशनी से जगमगाएगा। नगर परिषद लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने को प्रयासरत है।
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