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जिले में बदले पांच डीसी, अब तक नहीं बना लघु सचिवालय

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किराये के भवन में चल रहा आरटीए कार्यालय। - फोटो : CharkhiDadri
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प्रदेश के 22वें जिले चरखी दादरी को पिछले करीब ढाई साल में पांच डीसी मिले हैं, लेकिन अब तक लघु सचिवालय निर्माण की प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पाई है। लघु सचिवालय निर्माण के लिए जगह चयन को लेकर चल रही अटकलों पर सीएम मनोहर लाल ने गत रविवार को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान विराम लगा दिया। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि जगह चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जल्द ही लघु सचिवालय का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। हालांकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले निर्माण कार्य शुरू होता नजर नहीं आ रहा। अगर ऐसा हुआ तो लघु सचिवालय निर्माण का मामला फिर से लटक जाएगा।
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जिला उपायुक्त धर्मवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने करीब डेढ़ माह पहले सरकार को हुडा सेक्टर-दस की जमीन का प्रपोजल दोबारा से भेजा था। यह फाइल राजस्व विभाग की मार्फत सीएम तक पहुंचनी है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो लघु सचिवालय और कोर्ट कांप्लेक्स भवन निर्माण के लिए करीब 49 एकड़ जमीन एक्वायर की जानी है
सीएम मनोहर लाल ने सितंबर 2016 में चरखी दादरी को जिला बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने नवंबर 2016 में ही औपचारिकताएं पूरी करते हुए विधिवत रूप से जिला घोषित कर दिया था। इसके बाद ही लघु सचिवालय निर्माण के लिए जमीन चयन प्रक्रिया पूरी करने में जिला प्रशासन जुट गया था। पहले सीसीआई की जमीन का प्रस्ताव प्रदेश सरकार की मार्फत केंद्र सरकार तक भेजा गया। लेकिन इसमें अड़चनें आ जाने से अगली प्रक्रिया पर विराम लग गया। फिर जिला प्रशासन ने गांव समसपुर की जमीन का अवलोकन किया और रिपोर्ट तैयार कर राजस्व विभाग की मार्फत प्रदेश सरकार को भेजी। यहां भी लघु सचिवालय निर्माण की कवायद सिरे नहीं चढ़ पाई, जिसके चलते दोनों प्रपोजल को ड्रॉप करना पड़ा। इसके बाद जिला प्रशासन ने हुडा सेक्टर दस की जमीन को लघु सचिवालय और कोर्ट कांप्लेक्स निर्माण के लिए उपयुक्त माना और तीसरा प्रपोजल प्रदेश सरकार के पाले में भेजा। इसके मुताबिक करीब 49 एकड़ जमीन पर लघु सचिवालय और कोर्ट कांप्लेक्स बनना था।
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सरकार के पाले में प्रपोजल भेजने के बाद विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लग गई और इसी दौरान तत्कालीन डीसी का कार्यभार मुक्त कर दिया गया। उनकी जगह कार्यभार संभालने वाले डीसी मुकेश आहूजा ने ड्रॉप दोनों प्रपोजल दोबारा से सरकार के पास भिजवा दिए। इससे फिर मामला अटक गया। ये दो प्रपोजल भेजते ही जगह चयन को लेकर फिर से असमंजस की स्थिति बन गई। करीब डेढ़ माह पहले मौजूदा डीसी धर्मवीर सिंह ने राजस्व विभाग के पास जगह चयन संबंधी फाइल भेजी है। गत रविवार को जन आशीर्वाद यात्रा के रथ से सीएम मनोहर लाल ने लघु सचिवालय के लिए जगह फाइनल करने और जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की घोषणा भी की है। लेकिन निर्माण से पहले की प्रक्रिया काफी लंबी होने के चलते मामला विधनासभा चुनाव होने तक लटकता नजर आ रहा है।
चार नवंबर 2018 को सीएम ने सेक्टर दस की जगह को किया था फाइनल
चार नवंबर 2018 को चरखी दादरी पहुंचे सीएम मनोहर लाल ने नई अनाज मंडी में जनसभा को संबोधित करते हुडा सेक्टर दस की करीब 50 एकड़ जमीन पर लघु सचिवालय और कोर्ट कांप्लेक्स का निर्माण कराने की घोषणा की थी। इसके बाद जगह को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गए थे। तत्कालीन डीसी के सीसीआई और समसपुर की जमीन का प्रपोजल दोबारा भेजने से मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया।
किराये के भवनों में चल रहे सरकारी कार्यालय
मौजूदा लघु सचिवालय भवन का दायरा कम होने से कुछ विभागों के कार्यालय ही यहां खोले जा सकते हैं। जिला प्रशासन के पास जगह का अभाव होने से अभी भी कई कार्यालय किराये की जगहों पर चल रहे हैं। खासकर पटवारियों की सुविधा लोगों को एक छत के नीचे नहीं मिलने से लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। आरटीए विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित कुछ विभाग किराये की बिल्डिंगों में चल रहे हैं।
चरखी दादरी को ये मिले हैं डीसी
- जिला बनते ही भिवानी डीसी को चरखी दादरी डीसी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। इसके बाद आईएएस विजय सिद्प्पा को चरखी दादरी डीसी भेजा गया। उनका तबादला होने के बाद तत्कालीन चरखी दादरी एडीसी अजय सिंह तोमर को पदोन्नत कर सरकार ने डीसी बना दिया। उनके बाद मुकेश आहूजा को डीसी चरखी दादरी लगाया गया। इस समय आईएएस धर्मवीर सिंह चरखी दादरी डीसी हैं।
चरखी दादरी के डीसी धर्मवीर सिंह ने कहा कि सेक्टर-दस का प्रपोजल तैयार कर हमने राजस्व विभाग के पास भेज रखा है। वहां से फाइल सीएम को जाएगी और इसके बाद अंतिम मुहर लगेगी। हमारा प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द लघु सचिवालय के प्रोजेक्ट को सिरे चढ़वा दें।
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