डॉक्टर की कमी से महिलाओं व बच्चों की गंभीर अवस्था को देखते हुए रेफर करना पड़ रहा रोहतक पीजीआई
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहर के बीच स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में लंबे समय से जच्चा- बच्चा विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां तैनात स्टाफ नर्स व एनएचएम कर्मचारी ही डिलीवरी करवाते हैं। कई बार गर्भवती महिलाएं व बच्चे की गंभीर अवस्था को देखते हुए रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है। इसके कारण परिजनों और मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन से यहां आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग की है। ताकि, मरीजों को सुविधा हो सके।
सरदार झाडू सिंह चौक के पास मातृ-शिशु अस्पताल में प्रति माह लगभग 25 महिलाएं डिलीवरी के लिए आती हैं। अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों को जच्चा-बच्चा विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में कई महिलाओं में खून की कमी, हाई ब्लड प्रेशर होने के कारण यहां तैनात स्टाफ नर्सों को मरीज की जान बचाने के लिए रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है।
बता दें कि चिकित्सक की कमी होने के कारण प्रतिमाह 12 से अधिक महिलाओं को रोहतक रेफर करना पड़ रहा है। ऐसे में लंबा सफर होने के कारण गर्भवती महिलाओं की जान को जोखिम बना रहता है। वहीं, तीमारदारों को भी अतिरिक्त आर्थिक भार वहन करना पड़ता है।
इन लक्षणों के मिलने पर किया जाता है रेफर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकतर गर्भवती महिलाओं में खून की कमी हो जाती है, वहीं, बच्चे की धड़कन कम होना, गर्भ में बच्चा उल्टा होना, अल्प समय में बच्चे का जन्म होना, ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को रेफर करना पड़ता है।
स्टाफ नर्सों के सहारे चल रहा है एमसीएच
मातृ शिशु अस्पताल में केवल पांच स्टाफ नर्स ही तैनात हैं। इसके अलावा चार एनएचएम कर्मचारी भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करने का कार्य करते हैं। अस्पताल के लेबर रूम में तैनात नर्सें ही डिलीवरी करवाती हैं।
वर्सन:
हमने मातृ-शिशु अस्पताल में महिला व बाल विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा रखा है। चिकित्सक आने पर तैनाती कर दी जाएगी।
-डॉ. राजवेंद्र सिंह मलिक, कार्यवाहक सीएमओ
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सरदार झाडू सिंह चौक के पास बना मातृ-शिशु अस्पताल । संवाद