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खाप प्रधान MLA की अध्यक्षता में हुई पंचायत: धान की खेती करने पर किया तीन किसानों का बहिष्कार, दो ने मांगी माफी

Sun, 02 Jul 2023 11:35 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)

सार

वर्ष 2012 में ग्राम पंचायत ने धान लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। रविवार सुबह चरखी में ढाई घंटे तक आयोजित हुई पंचायत में बहिष्कार का निर्णय लिया गया। पंचायत की अध्यक्षता सांगवान खाप 40 के प्रधान एवं दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान ने की। 
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गांव चरखी में आयोजित पंचायत को संबोधित करते सांंगवान खाप-40 के प्रधान सोमबीर सांगवान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के चरखी दादरी के गांव चरखी में रविवार को आयोजित खाप पंचायत में धान की खेती करने पर तीन किसानों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। करीब ढाई घंटे तक पंचायत चली और इसमें खाप पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने अपने विचार रखे। इससे पहले खाप पदाधिकारियों और ग्रामीणों की 25 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई, जिसकी अगुवाई में ये फैसला लिया गया।

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बता दें कि धान की रोपाई से बढ़ने वाले बाढ़ जैसे हालात व मकानों को पहुंचने वाले नुकसान को देखते हुए चरखी में वर्ष 2012 में धान की रोपाई पर पंचायत ने प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद गांव में लंबे समय तक धान की खेती नहीं की गई। हाल ही में तीन किसानों ने अपने खेत में धान की रोपाई कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय इन तीनों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वो नही माने।

इस मसले पर ग्रामीणों ने रविवार को खाप और ग्राम पंचायत बुलाने का निर्णय लिया। रविवार सुबह 8.30 बजे शुरू हुई पंचायत 11 बजे तक चली। पंचायत की अध्यक्षता सांगवान खाप 40 के प्रधान एवं दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान ने की। पंचायत की जानकारी धान की खेती करने वाले तीनों किसानों को भी दी गई, लेकिन उन्होंने पंचायत से दूरी बनाकर रखी।
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पंचायत में मंच पर उपस्थित सांगवान खाप-40 प्रधान सोमबीर सांगवान, मास्टर ताराचंद चरखी और अन्य। संवाद

इस पर पंचायत में लोगों ने विचार-विमर्श कर तीनों का बहिष्कार करने का फैसला लिया। फैसले के अनुसार अब गांव का कोई भी व्यक्ति इन तीनों से किसी भी प्रकार का लेनदेन नहीं करेगा और न ही किसी प्रकार का संबंध रखेगा। वहीं, बताया जा रहा है कि दो और किसानों ने धान की खेती इस बार की, लेकिन उन्होंने पंचायत में पहुंचकर माफी मांग ली।

जलभराव और नमी करती है परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012 में ग्रामीणों ने गांव में धान की फसल बिजाई से होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। धान की खेती करने से गांव चरखी में जलभराव और नमी की समस्या बन जाती है। इन्हीं कारणों से गांववासी धान की खेती के खिलाफ है। ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर बढ़ने पर जलजनित बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ जाता है।
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पूरा गांव धान की खेती के खिलाफ है। इससे गांव में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। सरकार भी जल संरक्षण की मुहिम चलाए हुए है। धान की खेती पर रोक लगाकर पंचायत ने सरकार की मुहिम का समर्थन किया है। -सोमबीर सांगवान, विधायक एवं सांगवान खाप-40 प्रधान

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