चरखी दादरी। विवादित ढांचा ढहाने के लिए वर्ष 1990 और 1992 में चरखी दादरी से भी कई कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे। उनके जेहन में आज भी उस दौर की यादें ताजा हैं। कारसेवकों का वह संस्मरण ऐसा है जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है।
विवादित ढांचा गिराने अयोध्या पहुंचे कई कारसेवकों को गिरफ्तारी देनी पड़ी थी और चरखी दादरी से उस दौरान अयोध्या पहुंचे अजय बागला भी गिरफ्तार हुए थे। उन्हें 15 दिन जेल में बिताने पड़े थे। उस दौरान अयोध्या पहुंचे अरविंद मित्तल का कहना है कि वो नजारा कभी नहीं भूल सकते। उसकी यादें भी आज भी जेहन में ताजा हैं।
पांच-पांच के समूह में पहुंचे थे अयोध्या : अजय
अजय ने बताया कि वे दिल्ली से पांच-पांच लोगों के समूह में अयोध्या रवाना हुए थे। उन्हें मुरादाबाद में उतारकर गिरफ्तार किया गया और इसके बाद सेंट्रल जेल मुरादाबाद भेज दिया गया। जेल में कारसेवकों ने जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान जेल में मौजूद दूसरे समुदाय के लोगों के साथ उनकी झड़प भी हुई। मामला शांत होने पर 15 दिन बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। अजय का कहना है कि कई साल की मेहनत का ही परिणाम है कि 22 जनवरी को रामलला अयोध्या में विराजमान हो रहे हैं।
- 1989, 1990 और 1992 में तीन बार गया अयोध्या : अरविंद
चरखी दादरी नगर से ही अरविंद विवादित ढांचे को गिराने 1989, 1990 और 1992 में तीन बार अयोध्या पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में विवादित ढांचे पर झंडा फहराया गया। लाखों की संख्या में कारसेवक वहां पहुंचे थे। वो छावनी में ठहरे थे।
अयोध्या में गोली चलने से कई लोग मारे गए। उस दौरान सरयू नदी के पुल पर भी फोर्स तैनात थी। कारसेवकों ने विवादित ढांचे पर झंडा फहराया और पाइप से ढांचे की दीवार को तोड़ डाला। कई कारसेवक मलबे में दब गए थे। वो लम्हा और सारा मंजर आज तक जेहन में है।