हिलने वाले पत्थर के लिए मशहूर चरखी दादरी के गांव कलियाणा का नाम कविता ने रोशन करने का काम किया है। कविता सफलतम चंद्रयान-3 मिशन टीम का हिस्सा हैं। इससे पूर्व कविता चंद्रयान- 2 मिशन टीम का भी हिस्सा रहीं हैं।
अंडर मैट्रिक पिता और प्राइमरी कक्षा तक पढ़ी मां की तीसरे नंबर की बेटी कविता ने अपने गांव के साथ ससुराल सोनीपत का नाम भी रोशन किया है। पिता नरेश ने बताया कि कविता ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही स्थित परसराम हेतराम स्कूल में शुरू कर दसवीं कक्षा तक वहीं पर पूरी की।
इसके बाद वह 12वीं कक्षा तक दादरी में स्थित डीआरके स्कूल से पढ़ीं। इसके बाद सोनीपत के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन से बीटेक की। वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद टीसीएस कंपनी में काम करने लगीं।
पिता नरेश ने बताया कि देश के लिए कुछ करने के इरादे से उसका सपना इसरो में जाने का था। टीसीएस में जॉब करते हुए कविता इसरो के लिए तैयारी करती रहीं। 2017 में कविता का चयन इसरो के लिए हो गया।
पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर पर हैं कविता
कविता से दो बड़ी बहनें हैं। जिनमें सरोज स्नातकोत्तर, दूसरे नंबर की मुकेश कुमारी हैं। मुकेश टीसीएस में जॉब कर चुकीं है। फिलहाल पारिवारिक कारणों से नौकरी छोड़ी हुई है। वहीं छोटी बहन बीएससी करके गुरुग्राम में जॉब कर रहीं हैं। वहीं सबसे छोटा भाई सचिन नेवी में तैनात हैं।
दादाजी और परिजनों को दिया सफलता का श्रेय
कविता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादाजी और परिवार को दिया है। कविता का कहना है कि उनके परिजनों का सपना था कि परिवार के सभी बच्चे उच्च शिक्षा हासिल करे और परिवार के साथ गांव का नाम रोशन करें। उसका खुद का सपना भी था कि वह वैज्ञानिक बनकर देश के लिए उपलब्धि हासिल करे। इसरो में जाकर और चंद्रयान-3 मिशन का हिस्सा बनकर उसने इस सपने को पूरा किया है।
बेटियां भी आज किसी क्षेत्र में कम नहीं है। अगर उन्हें मौका मिले तो वो किसी भी क्षेत्र में अपना परचम लहरा सकतीं है। उनका हर उस मां-बाप से आह्वान है कि वो बेटे की तरह बेटियों को भी प्रोत्साहित करें।
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