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Charkhi Dadri News: लांस नायक शहीद मनोज अमर रहे के नारे से गूंजा समसपुर

Sun, 18 May 2025 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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शहीद मनोज को सलामी देते विधायक सुनील सांगवान। संवाद
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शहीद मनोज को सलामी देते विधायक सुनील सांगवान। संवाद
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अंत्येष्टि स्थल के समीप बने भवन की छत पर चढ़े युवा। संवाद
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अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद लोगों का हुजूम। संवाद
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हवा में फायर कर शहीद को सलामी देती सैन्य टुकड़ी।
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शहीद के अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचीं महिलाएं। संवाद
- शनिवार सुबह सेना के जवान पैतृक गांव लेकर पहुंचे शहीद की पार्थिव देह, अपने लाल को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब
कपूरथला में ड्यूटी के दौरान सिर में गोली लगने से शहीद हुआ समसपुर का लाल
- महिलाएं भी पहुंचीं अंत्येष्टिस्थल तक, नम आंखों से दी विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। शहीद लांस नायक मनोज फोगाट शनिवार सुबह पंचतत्व में विलीन हो गए। एनएच 334-बी के पास खाली जमीन पर उनको अंतिम विदाई दी गई। इससे पहले समसपुर गांव लांस नायक शहीद मनोज फोगाट अमर रहे... के नारे से गूंज उठा। नम आंखों से लोगों ने बहादुर बेटे को अंतिम विदाई दी। महिलाएं भी अंत्येष्टिस्थल तक पहुंचने से खुद को नहीं रोक पाईं।
समसपुर निवासी मनोज फोगाट दो भाइयों में छोटे थे। बड़े भाई की कई साल पहले एक हादसे में मौत हो गई थी। पिता राजवीर और शादीशुदा बहन की पहले ही मौत हो चुकी है। मनोज का बचपन मामा के गांव कांहड़ा में बीता है। वर्ष 2011 में वह सेना में भर्ती हुए। बाद में शादी होने पर पैतृक गांव समसपुर में शिफ्ट हो गए।मनोज की मौजूदा तैनाती पंजाब बॉर्डर पर कपूरथला में थी। वीरवार को ड्यूटी के दौरान सिर में गोली लगने से वह शहीद हो गए।
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शनिवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे शहीद की पार्थिव देह सैन्य वाहन से पैतृक गांव समसपुर लाई गई। सैन्य जवानों के कंधों पर ताबूत में अपने लाल को देखकर मां संतोष और पत्नी रेखा रोने-चिल्लाने लगीं। वहीं, बच्चे पांच वर्षीय बेटा प्रिंस और सात वर्षीय बेटी दीक्षा मासूमियत से पास खड़े कभी पिता तो कभी मां व दादी की तरफ देखते रहे। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। लोगों ने खुद के साथ शहीद लांस नायक मनोज फोगाट के परिजनों को संभाला और अंतिम यात्रा से पहले की रस्में पूरी कराईं।
इसके बाद जब तक सूरज चांद रहेगा, शहीद मनोज तेरा नाम रहेगा, शहीद लांस नायक मनोज फोगाट अमर रहे...के नारे लगाते हुए शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें करीब डेढ़ हजार से अधिक लोग शामिल हुए। आलम यह रहा कि अंत्येष्टिस्थल पर पांव रखने तक की जगह नहीं बची।

- जगह पड़ी कम, छतों पर चढ़े लोग
लोगों की संख्या इतनी ज्यादा रही कि अंत्येष्टिस्थल छोटा पड़ गया। युवा पास बने भवनों की छतों पर चढ़ गए और अंतिम संस्कार होने तक वहीं बैठे या खड़े रहे। बेटे प्रिंस के मुखाग्नि देने के बाद युवा छतों से नीचे उतरकर घरों की तरफ रवाना हुए।

- 50 से ज्यादा महिलाएं पहुंचीं अंत्येष्टिस्थल तक
अमूमन, ग्रामीण क्षेत्रों में दाह-संस्कार स्थल तक महिलाएं नहीं जाती हैं। लेकिन, शहीद लांस नायक मनोज फोगाट की अंतिम विदाई में 50 से अधिक महिलाएं अंत्येष्टिस्थल तक पहुंचीं। प्रिंस के मुखाग्नि देने के बाद ही वे घरों के लिए रवाना हुईं।
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- मनोज की शहादत पर गर्व
मंत्री श्रुति चौधरी, सांसद धर्मबीर सिंह और दादरी विधायक सुनील सांगवान ने भी शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि शहीद लांस नायक मनोज की शहादत पर गर्व है। परिवार की हरसंभव मदद सरकार से कराई जाएगी।
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