पर्युषण पर्व के अंतिम दिन जैन समाज के लोगों ने विभिन्न गतिविधियों में लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन जैन समाज के लोगों ने क्षमा याचना पर्व मनाया। एसएस जैन सभा के प्रधान इंद्र जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व को पर्वों का राजा कहा जाता है। इस दिन जैन धर्म के लोग मन, वचन, काया से दूसरे को किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक क्षति पहुंचाने के लिए क्षमा मांगते हैं। समाज के लोग गाली-गलौज करना, अपशब्दों का प्रयोग, कटु वचन बोलना व झगड़ा करने आदि को पाप मानते हैं। इस दिन समाज के लोग साल भर में किए जाने वाले पापों से मुक्त होने के लिए 84 लाख जीव-योनियों से क्षमा याचना करते हैं।
इस अवसर पर आनंद मुनि महाराज ने कहा कि वाणी में समरसता, व्यवहार में शिष्टता, क्षमा में उदारता ही मानव की पराकाष्ठा है। इस दौरान समाज के लोगों ने इकासने, अठाइयां, आयंबिल, व्रत किए। दिल्ली से आए स्वाध्याय वाचकों को सम्मानित किया गया। लक्की जैन, संदीप जैन, पवन जैन ने मौन व्रत किया। मधु जैन, सविता जैन, पुष्पा जैन ने पौषध व्रत किया।
श्रीजैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के महामंत्री संजय जैन ने सभी से क्षमा याचना की। समाज सेवी तिलक जैन का माला व पटका पहनाकर सम्मान किया गया। संजय जैन ने बताया कि बाल कलाकार दक्ष और प्रियांशी ने कविता के माध्यम से क्षमा याचना की। महिला मंडल की कोषाध्यक्ष नीलम जैन ने भजन के माध्यम से क्षमा का महत्व बताया। आदेश जैन ने महामंत्र नवकार के अखंड जाप का लाभ लिया।
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जैन समाज के कार्यक्रम में धार्मिक क्रिया पूरी करते भक्त। स्रोत : जैन समाज