चरखी दादरी। क्षेत्र के लोगों को नहरी पानी की समय सारिणी रास नहीं आ रही है। लोगों ने जिले की नहरों के पानी की समय-सारिणी में बदलाव करने की मांग की है। लोगों का तर्क है कि नहरों में लंबे समय तक पानी न छोड़ने से पेयजल और सिंचाई का संकट बना है। नहरों में 15 दिन के बजाय 24 दिन में पानी छोड़ा जा रहा है जबकि 15 दिन में 15 दिन के लिए छोड़ा जाना चाहिए। तभी पानी की पर्याप्त आपूर्ति संभव है।
उपभोक्ताओं ने बताया कि पहले जिले की नहरों में 15 दिन में ही पानी छोड़ा जाता था लेकिन पिछले चार साल से समयसारिणी में बदलाव किया है जो लोगों को रास नहीं आ रहा है। इससे न तो पेयजल की पूर्ति हो पा रही है और न ही सिंचाई हो पा रही है। कई नहरों में तो मात्र सात दिन के लिए ही पानी छोड़ा जा रहा है। जिले का कुल कृषि क्षेत्र 1.21 लाख हेक्टेयर है जिसकी समय पर सिंचाई नहीं हो पाती है।
जिले में सदा पेयजल संकट बना रहता है। खासकर शहर में हालात ज्यादा खराब हैं। अभी जिले के अधिकतर जलघरों में पानी नाकाफी है। नहरी पानी पर ही पेयजल की आपूर्ति भी निर्भर है क्योंकि जलघरों में नहरों से ही पानी भरा जाता है। इस कारण गर्मी समेत सर्दी में भी यहां पानी का संकट बना रहता है। मई-जून में पानी की खपत बढ़ने से हालात विकट हो जाते हैं।
- ये हैं मुख्य नहरें, माइनर और डिस्ट्रीब्यूटरी
जिले में मेन लोहारू केनाल, बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मैहड़ा, बरसाना और कितलाना डिस्ट्रीब्यूटरी से जलघरों में पानी डाला जाता है। नहरों में पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाने के कारण कई गांवों के जलघरों तक पानी नहीं पहुंच पाता जबकि प्रत्येक बारी के दौरान पानी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। तभी सभी लोगों को पर्याप्त पानी मिल सकता है।
किसान बोले : 15 दिन में आना चाहिए नहरी पानी
किसान चंद्र सिह, साहिल, कर्मबीर सिंह, चांद सिंह और सुंदर का कहना है कि जिले की नहरों में 24 के बजाय 15 दिन में पानी छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि जिले में अक्सर पानी का संकट बना रहता है। सरकार को नहरी पानी की समयसारिणी में बदलाव करना चाहिए, तभी जिले की जनता को राहत मिलेगी।
समय सारिणी मुख्यालय से तय की जाती है। उपलब्धता के हिसाब से नहर में पानी छोड़ा जाता है। उच्चाधिकारियों के स्तर से ही समय सारिणी में बदलाव किया जा सकता है। – हरवीर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग, चरखी दादरी।