शहर के जलघर में बना वाटर टैंक।
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चरखी दादरी। शहरी क्षेत्र के सभी पेयजल कनेक्शन परिवार पहचान पत्र से लिंक होने चाहिए, अन्यथा भविष्य में कनेक्शन काटा जा सकता है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में परिवार पहचान पत्र से कनेक्शनों को जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। अब शहरी क्षेत्र में परिवार पहचान पत्र से कनेक्शनों को जोड़ने का अभियान शुरू किया गया है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता रमेशचंद्र गौड़ ने बताया कि शहर में कुल 12 हजार 356 पेयजल कनेक्शन हैं, जिनमें से अब तक दो हजार 342 उपभोक्ताओं को पीपीपी से जोड़ा जा चुका है। इस कार्य के लिए विभाग की सात टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों के सदस्य डोर-टू-डोर जाकर इस कार्य को सिरे चढ़ाने में लगे हुए हैं। पीपीपी से न जुड़ने वाले उपभोक्ता निकट भविष्य में जनस्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं। इतना ही नहीं, कनेक्शन काटने की भी कार्रवाई की जा सकती है।
जल एवं स्वच्छता संगठन के जिला सलाहकार योगेंद्र परमार ने बताया कि पहले गांवों के पेयजल उपभोक्ताओं को पीपीपी से जोड़ा गया था। अब शहरी उपभोक्ताओं के परिवार पहचान पत्र लिंक किए जा रहे हैं। यह कार्य कर रही किसी टीम में तीन तो किसी में चार सदस्य शामिल हैं जिनका कनेक्शन लिंक नहीं होगा, उनकी शिकायतों का निवारण नहीं किया जाएगा। कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। टीम में शामिल सदस्य घरों में जाकर पेयजल कनेक्शन को पीपीपी से जोड़ने के अलावा लोगों को जल संरक्षण का महत्व भी बता रहे हैं। नल पर टूटियां लगवाने और पानी की व्यर्थ बर्बादी रोकने के लिए नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक बार कनेक्शन कट जाने के बाद उसे जुड़वाने के लिए फिर से सारी कार्यवाही पूरी करनी पड़ेगी।