गीता और प्रमिला ने बताया कि अप्रैल से लेकर जनवरी तक प्रतिदिन 60 से 70 प्लेट निकल जाती थीं, लेकिन अब यह आंकड़ा 20 से 25 पर ही सीमित है। म्हारी रसोई का संचालन वैसे एक निजी कंपनी कर रही है, जिसके जरिये इन महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। गीता का कहना है कि उन्हें फिलहाल छह हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। पहले काम ज्यादा था तो उन्हें आठ हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे। गीता का कहना है कि छह हजार रुपये में वह बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च आसानी से उठा रही है, जबकि उसके पति की कमाई से घर के अन्य खर्च चल जाते हैं। गीता का कहना है कि जब से उसने कमाना शुरू किया है, परिवार की माली हालत में थोड़ा सुधार हुआ है। प्रमिला का कहना है कि पति का घर खर्च में हाथ बंटाकर उसे बेहद सुखद अनुभूति होती है।
म्हारी रसोई के स्वास्थ्य विभाग पर बकाया है साढ़े सात लाख
सूत्रों के अनुसार कोविड-19 अस्पताल में भर्ती संक्रमितों और स्टाफ के लिए लॉकडाउन के दौरान खाना म्हारी रसोई से भेजा गया। इसका भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ करीब साढ़े सात लाख रुपये बकाया है और यह मामला डीसी के संज्ञान में भी लाया जा चुका है।
बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी उठाकर मिलती है खुशी
मेरी उम्र 29 साल है। पति पेशे से श्रमिक है और लॉकडाउन लगने के कारण पति का रोजगार छूट गया था। उस समय प्रशासन की मदद मिलने से म्हारी रसोई में काम करना शुरू किया और आठ हजार रुपये में घर खर्च आसानी से चल गया। अब बच्चों की फीस और रसोई का खर्च मैं उठाती हूं, जबकि पति की कमाई में से बच्चों के भविष्य के लिए थोड़ी बहुत बचत हो जाती है। घर की जिम्मेदारी उठाकर बेहद खुशी मिल रही है। - गीता देवी, खेड़ी सनवाल
मेरे पति का गांव में छोटा किराना स्टोर है। लॉकडाउन में पति की दुकान बंद रही और कमाई का दूसरा जरिया नहीं था। इसके चलते मैंने काम करने की ठानी। थोड़ा प्रयास किया तो सिविल अस्पताल में संचालित म्हारी रसोई में काम मिल गया। इससे लॉकडाउन में रसोईघर का खर्च आसानी से निकल गया। अब 11 माह से मैं ये काम कर पति का घर खर्च में हाथ बंटा रही हूं, जिसकी मुझे बेहद खुशी है।
- प्रमिला, खेड़ी सनवाल
ऐसी महिलाओं पर हमें नाज हैं। आज महिलाएं किसी भी काम में पीछे नहीं हैं और जिले की कई बेटियों व महिलाओं ने इस बात को सिद्ध किया है। महिला सशक्तीकरण के तहत प्रशासन जरूरतमंद महिलाओं की हरसंभव मदद के लिए तत्पर है। -राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी