चरखी दादरी। जिले की 167 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए प्रत्येक पंचायत ने 20 से 50 लाख रुपये तक के बजट के एस्टीमेट बनाकर संबंधित विभाग को भेजे थे, लेकिन बजट नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। बजट के अभाव में जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। नई पंचायतों का गठन होने के बाद सरपंचों ने गांवों के विकास कार्याें के प्रस्ताव तैयार कर विभाग में जमा भी करवाए थे।
भेजे गए बजट की राशि मिलने पर ग्राम पंचायतें अपने हिसाब से गांवों में विकास कार्य करवाना चाहते थे, लेकिन बजट के अभाव में सभी काम रुक गए। वहीं पंचायत विभाग के अधिकारियों की माने तो उनकी ओर से सभी प्रस्तावों के एस्टीमेट तैयार कर बजट स्वीकृति के लिए मुख्यालय को भेजे जा चुके हैं। इस बजट से जिले में खंड स्तरीय खेल स्टेडियम, पुस्तकालय भवन, पंचायत भवन, कॉलेज सभागार, फिरनी निर्माण, खेतों के रास्तों का निर्माण, सामुदायिक केंद्र भवन, आंबेडकर भवन, जोहड़ों की सफाई, पार्क व सामुदायिक केंद्रों का निर्माण होना है। वहीं सरकार गांव की आबादी के हिसाब से ग्रांट देने की पॉलिसी बनाने जा रही है। इसके अलावा मनेरगा के तहत भी गांवों में काफी कार्य होने हैं।
- नौ माह का समय बीता चौधर संभाले, पर अभी तक नहीं मिला है बजट
बता दें कि जिले में पिछले वर्ष नवंबर माह में ग्राम पंचायतों के चुनाव संपन्न होने के बाद चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने 3 दिसंबर को शपथ ग्रहण की थी। इसके बाद 14 दिसंबर को ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव व ग्रामीणों की उपस्थिति में सरपंच व ग्राम पंचायत के चुने गए पंचों ने कार्यभार संभाल लिया था। अब नौ माह का समय बीतने के बावजूद भी ग्राम पंचायतों के खातों में उनकी ओर से भेजे गए प्रस्तावों के एस्टीमेट के अनुसार राशि भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में गांवों में सरपंचों के खिलाफ भी लोगों में धीरे-धीरे रोष पैदा होता जा रहा है। वहीं बजट के अभाव में सरपंच भी विकास को लेकर लाचार नजर आ रहे हैं।
- बजट के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना पड़ी बंद
गांवों में श्मशान घाट के रास्तों, चहारदीवारी, सामुदायिक भवन, फिरनी व कच्चे रास्तों को पक्का करना, गांवों में पेयजल के लिए व्यवस्था कराना, गंदे पानी की निकासी के लिए लाइनें बिछाना, पुराने भवनों की मरम्मत, कच्ची गलियों के पक्के निर्माण, पंचायत भवनों की मरम्मत सहित अनेक कार्य लंबित पड़े हैं। सरकार की योजना के अनुसार 15 हजार की आबादी से अधिक गांवों में शहरी तर्ज पर सुविधाएं मुहैया करानी थी लेकिन बजट के अभाव में कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। कई गांवोंं में दूषित पानी निकासी के लिए सीवर की अंडरग्राउंड लाइन भी बिछाने का प्रस्ताव है। यह लाइन मेन रास्तों में बिछाई जानी हैं ताकि दूषित पानी की निकासी होती रहे।
- अधिकांश ग्राम पंचायतों ने पीआरआई ग्रांट की खर्च
करीब पांच माह पहले गांवों में पीआरआई ग्रांट जरूर आई थी लेकिन इससे छोटे स्तर के कार्य ही पूरे हो सके हैं। अब जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों ने पीआरआई ग्रांट को खर्च कर लिया है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में न्यूनतम पांच से 25 लाख तक का बजट पंचायतों पीआरआई ग्रांट के रूप में जारी हुआ था। इस बजट से गांवों में नालों, गलियों व अन्य छोटे स्तर के विकास कार्य किए गये हैं। अब बड़े विकास कार्यों के लिए पंचायतों ने विभाग के पास प्रस्ताव जमा करवा रखे हैं लेकिन बजट के अभाव में राशि जारी नहीं हो पा रही है। गांव बडराई में करीब एक करोड़ से अधिक बजट से खंड स्तर का खेल स्टेडियम प्रस्तावित है। इसी प्रकार करीब इतने ही बजट से द्वारका में देवीलाल खेल स्टेडियम का निर्माण होने जा रहा है। गांव बेरला में भी खेल स्टेडियम निर्माण की योजना है। इस प्रकार करीब पांच करोड़ से ज्यादा राशि के विकास कार्य बजट के अभाव में अटके हैं। सरपंचों ने सरकार से बजट जारी करने की मांग की है।
- क्या कहना है कि सरपंचों का
गांव में करीब 50 लाख रुपये के बजट के प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजा हुआ, बजट का इंतजार है। सरकार को अब तो बजट जारी करना चाहिए ताकि गांवों में विकास कार्य गति पकड़ सकें। ग्रामीणों ने बड़ी उम्मीद से उन्हें गांव की चौधर सौंपी थी लेकिन अब विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों के ताने सुनने को मजबूर हो रहे हैं।
- सरपंच रामनिवास, ग्राम पंचायत, इमलोटा
एस्टीमेट तैयार कर पंचायत विभाग को जमा करवाया हुआ हैं लेकिन बजट नहीं आने से काम शुरू नहीं हो पाया है। गांव में श्मशान घाट का रास्ता कच्चा है। पानी की टंकी नहीं है। गांव की फिरनी, खेतों के रास्ते, सामुदायिक केंद्र व आंबेडकर भवन निर्माण के लिए भी प्रस्ताव पास करके भेजे थे। लेकिन बजट नहीं मिल रहा है।
-सरपंच विपिन कुमार, ग्राम पंचायत घिकाड़ा
गांव में विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव पारित कर विभाग को भेज रखे हैं। अब बजट का इंतजार है। बजट मिलने पर ही काम शुरू हो सकेंगे। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करवाना पंचायत का प्रथम कार्य है। लोगों ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें चुना है लेकिन खजाना खाली होने के कारण वह भी कुछ नहीं करा पा रहे हैं।
- सरपंच सचिन कुमार, ग्राम पंचायत मकड़ानी
पंचायत विभाग ने ग्राम पंचायतों की ओर से भेजे गए सभी प्रोजेक्ट के एस्टीमेट तैयार कर हेड ऑफिस में बजट की स्वीकृति के लिए फाइल भेजी हुई है। जैसे ही बजट मिलता है ग्राम पंचायतों के खातों में डाल दिया जाएगा। बजट जारी होते ही ग्राम पंचायतें विकास कार्य शुरू कर सकती हैं।
- भरत सिंह, एक्सईएन, विकास एवं पंचायत विभाग