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Charkhi Dadri News: स्वास्थ्य सेवाएं बीमार, चिकित्सकों के 38 पद खाली, तीन पीएचसी में तैनाती ही नहीं

Sun, 02 Jun 2024 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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 सिविल अस्पताल में बनाया गया ओपीडी ब्लॉक । संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। जिले में चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बीमार पड़ी हैं। इस समय जिले में चिकित्सकों के 38 पद खाली हैं। इनमें फिजिशियन, बाल रोग, ईएनटी, सामान्य सर्जन, एमडी मेडिसिन, मनोरोग, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट आदि विशेषज्ञ के पद शामिल हैं। हालात ये है कि जिले में तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में एक भी चिकित्सक तैनात नहीं हैं। यहां दूसरे अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों की ही अदलाबदली करके ड्यूटी लगाई जा रही है।
पूरे जिले में चिकित्सकों के स्वीकृत 95 पदों के सापेक्ष मात्र 57 ही तैनात हैं। इस कारण जिले की चिकित्सा सेवा प्रभावित हो रही है। जिले की आबादी करीब साढ़े छह लाख से अधिक है। लोगों के लिए जिले में सिविल अस्पताल और मातृ शिशु अस्पताल के अलावा तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 12 पीएचसी संचालित हैं। इसके बावजूद जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के 40 फीसदी पद खाली हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के अलावा विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को कई सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले से रोजाना 100 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा उपचार लेना पड़ रहा है।
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इस संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग के पास 15 वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए कोई फिजिशियन नहीं है। फिजिशियन की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग कई बार मुख्यालय को मांगपत्र भेज चुका है, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल सके।


सिविल अस्पताल में 42 में से सिर्फ 17 ही चिकित्सक
विशेषज्ञों की कमी का सीधे तौर पर असर जिला मुख्यालय स्थित सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। जिला बनने के बाद भी सिविल अस्पताल उपमंडल अस्पताल की तर्ज पर चल रहा है। सिविल अस्पताल में चिकित्सक के सृजित कुल 42 पदों में से मात्र 17 पर ही तैनाती है। मातृ शिशु अस्पताल में चिकित्सकों के 70 फीसदी पद खाली हैं। सात पीएचसी में भी 50 फीसदी चिकित्सक ही तैनात हैं। डिप्टी सीएमओ के पद खाली होने से सात एमओ के पास इनका प्रभार भी है। इसके चलते स्वास्थ्य केंद्रों पर वह भी मरीजों को इलाज नहीं दे पा रहे हैं।





विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रयास नहीं आए काम

जिला स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मजबूरीवश मरीजों को भी दूसरे जिले के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।






बिन चिकित्सक के चल रहे पीएचसी
जिले में सात पीएचसी पर जरूरत के अनुसार 50 फीसदी चिकित्सक ही तैनात हैं। तीन पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक ही तैनात नहीं किए हैं। इनमें माईकलां, मानकावास और कादमा के पीएचसी शामिल हैं। अधिकांश सीएचसी व पीएचसी में चिकित्सकों की कमी के चलते डेंटल सर्जन या फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है।
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वर्जन
जिले में चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों के पास मांगपत्र भेज चुके हैं। चिकित्सक मिलते ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती कर कमी दूर कर दी जाएगी, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है। - डॉ. गौरव भारद्वाज, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी।
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